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उत्तराखंड: एसटीएफ ने 68 लाख ठगने वाले को दिल्ली से किया गिरफ्तार, बंद पड़ी बीमा पॉलिसी के नाम पर की धोखाधड़ी
Sat, 14 Aug 2021 02:45 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 14 Aug 2021 02:45 PM IST
सार
जानकारी के मुताबिक बंद पड़ी बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण और प्रीमियम को शेयर मार्केट में लगाने की बात कहकर आरोपी देवेश नंदी ने 68 लाख की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
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devesh nandi
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सात साल तक महिला को लालच देकर ठगने वाले आरोपी को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने महिला की पॉलिसी का पैसा मार्केट में लगाने का लालच दिया था। महिला ने उसके खाते में सात सालों में लगभग 68 लाख रुपये जमा करा दिए। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि एक महिला ने शिकायत में बताया था कि उनके पास 2014 में एक युवक ने फोन किया था। उसने खुद को बीमा कंपनी का एजेंट बताया था। उस वक्त महिला ने भी बीमा पॉलिसी ली हुई थी। सभी जानकारी उसने सही बताई तो महिला ने उस पर विश्वास कर दिया। उसने महिला को कहा कि उनकी पॉलिसी बंद होने वाली है। इसमें टॉप-अप के रूप में कुछ पैसा जमा कराएंगी तो पॉलिसी रिन्यू हो जाएगी। इसके बाद पॉलिसी के पैसे को शेयर बाजार में निवेश किया जाएगा। कथित एजेंट ने विश्वास दिलाया कि इससे उन्हें मोटा मुनाफा होगा। महिला ने भी यह रकम बिना किसी पड़ताल के उसके खाते में जमा कर दी। इसके बाद लगातार उन्हें किसी न किसी बात को लेकर वह फोन करता रहा। महिला भी खाते में पैसे जमा कराती रही। यह सिलसिला सात सालों तक चला।
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कुल मिलाकर 68 लाख रुपये ठग के खाते में जमा कर दिए गए। इसके बाद जब उनकी पॉलिसी मैच्योर हुई तो पता चला कि यह रकम तो उन्होंने कहीं और दे दी है। इस पर उन्होंने साइबर थाने को शिकायत की। मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस और एसटीएफ ने बैंक खातों व अन्य तरीके से जांच की। मालूम हुआ कि यह खाते देवेश नंदी निवासी शाहदरा, दिल्ली ने फर्जी नाम पतों पर खुलवाए हैं। कई खातों में उसके अपने दस्तावेज भी लगाए हुए थे। इस मामले में उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया।
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उसके पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुआ है। लैपटॉप के डाटा की भी पड़ताल की जा रही है। कुछ संदिग्ध जानकारी लैपटॉप से अब तक मिली है। इसकी तस्दीक के बाद अन्य खुलासा भी किया जा सकता है।
कम से कम दफ्तर में कर लें पड़ताल
यदि आपके पास कोई खुद को बीमा एजेंट बताते हुए कॉल करता है तो सावधान हो जाएं। उनके पास पहले से आपकी पॉलिसी की जानकारी होती है। ऐसे में उनकी बातों में आने की जरूरत नहीं है। यदि आपने पॉलिसी की है तो वह किसी एजेंट या दफ्तर के माध्यम से की होगी। ऐसे में जब कभी ऐसा फोन आए तो कम से कम बीमा कंपनी के दफ्तर में इसकी तस्दीक जरूर कर लें। ऐसे में आप इस तरह की ठगी से बच सकते हैं। यही नहीं अगर कोई बात संदिग्ध दिखे तो उसे साइबर थाना पुलिस को जरूर बताएं।