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उत्तराखंड: पर्वतीय शिल्प कला के अनुरूप हो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के स्टेशन- भाष्कर खुल्बे

Sat, 25 Sep 2021 12:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 25 Sep 2021 12:25 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार भाष्कर खुल्बे ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान के संबंध में चर्चा की।

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uttarakhand news: Rishikesh-Karnprayag railway line station should be with mountain craftsmanship - Bhaskar Khulbe
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार भाष्कर खुल्बे - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार भाष्कर खुल्बे ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के स्टेशनों को पर्वतीय शिल्प कला के अनुरूप बनाया जाए। इससे पर्वतीय क्षेत्र के शिल्पियों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।    

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35 किलोमीटर की टनल के निर्माण की लागत लगभग 8750 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में देहरादून से विश्वस्तरीय टिहरी झील जाने के लिए मसूरी-चम्बा कोटी कालोनी मोटर मार्ग से होकर कुल 105 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, पूरा मार्ग पर्वतीय क्षेत्र है। इस मार्ग से होकर जाने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। इस मार्ग के लिए टनल देहरादून के राजपुर के पास से प्रस्तावित है, जो टिहरी झील के पास कोटी कालोनी में समाप्त होगी। 35 किलोमीटर की इस टनल के निर्माण की लागत लगभग 8750 करोड़ रुपये आएगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स ऋषिकेश होने के बाद भी राज्य के पर्वतीय दूरदराज कुमाऊं मंडल के इलाके, भौगोलिक दूरी होने के कारण सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। राज्य के कुमाऊं मंडल में एम्स की स्थापना करने से  कुमाऊं के नागरिकों के साथ ही उत्तर प्रदेश के निकटवर्ती जनपदों के लोगों को भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एम्स के लिए भूमि उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। पूर्व में भी एक राज्य में दो एम्स जैसे विश्व स्तरीय संस्थान स्थापित किए गए हैं।  
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के क्षेत्रीय सामाजिक सांस्कृतिक एवं पर्यटन के विकास और सामरिक दृष्टिकोण से रेल मंत्रालय द्वारा टनकपुर और बागेश्वर के बीच नैरो गेज रेलवे लाइन के लिए सर्वे का आदेश जारी किया गया है। यह लाइन ब्राडगेज में होनी चाहिये। चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित होने के कारण यह रेल लाइन सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही यह नए व्यापार केंद्रों को भी जोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामरिक उद्देश्य और सीमांत जनपदों के विकास की आवश्यकता को देखते हुए टनकपुर बागेश्वर रेलवे लाइन का नैरो गेज की बजाय ब्राडगेज लाइन का सर्वे किया जाए। 

रेल लाइन पर बनाये जा रहे हैं 12 स्टेशन और 17 टनल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चार धाम सड़क परियोजना के साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तराखंड को बड़ी देन है। वह समय दूर नहीं, जब पहाड़ में रेल का सपना पूरा होगा। इससे राज्य की आर्थिकी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मार्च 2024 तक परियोजना को पूरा किए जाने के लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है। ऋषिकेश के बाद परियोजना मुख्यत: अंडरग्राउंड है। भूमि अधिग्रहण किया जा चुका है। इस रेल लाइन पर 12 स्टेशन और 17 टनल बनाये जा रहे हैं।

काम तय समय में पूरा किया जा सके, इसके लिए विभिन्न स्थानों पर एक साथ काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सात अक्तूबर को जौलीग्रांट, देहरादून में बने नए टर्मिनल का लोकार्पण किया जाएगा। हेली समिट के दौरान देहरादून-पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर- देहरादून हवाई सेवा का फ्लैग ऑफ भी किया जाएगा। यह सेवा पवनहंस द्वारा दी जाएगी। देहरादून-पिथौरागढ़ हेली सेवा को जल्द स्वीकृति दिए जाने एवं नैनीसेनी हवाई पट्टी के विस्तार की उन्होंने जरूरत बतायी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में उड़ान के तहत देहरादून -श्रीनगर-देहरादून, देहरादून-गौचर-देहरादून, हल्द्वानी-हरिद्वार हल्द्वानी, पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर, चिन्यालीसौड़-सहस्त्रधारा-चिन्यालीयौड़, गौचर-सहस्त्रधारा-गौचर, हल्द्वानी -धारचूला-हल्द्वानी तथा गौचर-सहस्त्रधारा-गौचर हेली सेवाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए जो 13 हेलीपोर्ट चिन्हित किए गए हैं, उनमें से 11 की डीपीआर तैयार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देहरादून-पिथौरागढ़ हेली सेवा शुरू होने से सीमांत क्षेत्र पिथौरागढ़ के विकास के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति दिए जाने की अवधि जून 2022 में समाप्त हो रही है, राज्य की आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिए जीएसटी कंसेसन की अवधि को बढ़ाया जाना राज्य हित में है। इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एसएस. संधू, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव दिलीप जावलकर, विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ. पराग मधुकर धकाते, प्रधानमंत्री कार्यालय के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल भी मौजूद रहे।

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