फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand News Ramp or synthetic track Not Available for Disabled players Practice in State

Uttarakhand: बिना मैदान दिव्यांग खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना रहे पहचान, रैंप और सिंथेटिक ट्रैक तक नहीं

Tue, 06 Aug 2024 06:35 PM IST
अलका त्यागी करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 06 Aug 2024 06:35 PM IST
सार

प्रदेश के 300 दिव्यांग खिलाड़ियों में से 50 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों, 200 राष्ट्रीय, 50 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। साथ ही दर्जनभर से अधिक पदक जीत चुके हैं।

विज्ञापन
Uttarakhand News Ramp or synthetic track Not Available for Disabled players Practice in State
दिव्यांग खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

बिना मैदान और सुविधाओं के उत्तराखंड के दिव्यांग खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं। प्रदेश के करीब 300 खिलाड़ी जिला से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपने हुनर से उत्तराखंड समेत देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उत्तराखंड के मैदानों में सुविधाएं नहीं होने से दिव्यांग खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे राज्यों का सफर करना पड़ रहा है।

विज्ञापन


प्रदेश के 300 दिव्यांग खिलाड़ियों में से 50 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों, 200 राष्ट्रीय, 50 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। साथ ही दर्जनभर से अधिक पदक जीत चुके हैं। दिव्यांग खिलाड़ियों का कहना है कि प्रदेशभर में कहीं भी ऐसा मैदान नहीं है जहां उन्हें रैंप, रेलिंग जैसी सुविधाएं मिलें। इतना ही नहीं महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज को छोड़कर किसी भी मैदान में सिंथेटिक ट्रैक तक नहीं हैं। आलम यह है कि राजधानी दून के परेड मैदान में बने बहुउद्देश्यीय हॉल में भी रैंप, रेलिंग जैसी सुविधाएं नहीं हैं। दिव्यांग खिलाड़ियों को एथलेटिक्स में अभ्यास करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि, स्पोर्ट्स कॉलेज का मैदान भी सिर्फ कॉलेज के छात्रों के लिए है।
विज्ञापन


खेल आयोजनों के लिए सरकार नहीं करती मदद
पैरा खिलाड़ियों का आरोप है कि सरकार की ओर से किसी प्रकार की खेल गतिविधियां का आयोजन उनके लिए नहीं किया जाता। इतना ही नहीं पैरालंपिक एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से आयोजित होने वाली गतिविधियों में भी सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं की जाती। एसोसिएशन के समन्वयक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला के कोच प्रेम कुमार ने बताया, एसोसिएशन की ओर से ही खेल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


Uttarakhand: तीन दिन के विधानसभा मानसून सत्र पर विपक्ष ने खड़े किए सवाल, की अवधि बढ़ाने की मांग

70-80 घंटे का सफर कर पहुंच रहे दूसरे राज्य
कोच प्रेम कुमार ने कहा, अभ्यास के लिए प्रदेश के दूर दराज व सीमांत इलाकों से आने वाले दिव्यांग खिलाड़ी 07-08 घंटे का सफर कर दूसरे राज्य पहुंच रहे हैं। इस दौरान दिव्यांग खिलाड़ियों को परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर प्रदेश में ही दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए मैदान तैयार किया जाए तो उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

खिलाड़ियों को खेल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव कार्य किए जा रहे हैं। रही बात मैदानों में रैंप, रेलिंग व अन्य सुविधाओं की तो इसे एक बार दिखा लिया जाएगा। जहां भी कमी मिलेगी वहां सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- जितेंद्र सोनकर, निदेशक, खेल विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed