उत्तराखंडः मंत्रालयों के बंटवारे में धामी का सेफ गेम प्लान, तीनों वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की थी चर्चा
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर प्रदेश संगठन के नेताओं से भी गहन मंथन किया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मंत्रियों में काम का बंटवारा कर दिया। उन्होंने अपनी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों सतपाल महाराज, डॉ.हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य को लोनिवि, ऊर्जा और आबकारी सरीखे अहम विभाग दिए। इसे सियासी हलकों मे तीनों वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी दूर करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि युवा मुख्यमंत्री वरिष्ठ और अनुभवी मंत्रियों को आगे रखकर अपनी पारी को बढ़ाना चाहते हैं।
सरकार के इस फैसले को मुख्यमंत्री के सेफ गेम प्लान के तौर पर देखा जा रहा है। यह संयोग ही है कि मंत्रियों की शपथ से पूर्व तीनों वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी की चर्चाएं खासी गर्म थीं। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर प्रदेश संगठन के नेताओं से भी गहन मंथन किया।
काफी सोच विचार के बाद यह तय हुआ कि तीरथ मंत्रिमंडल में जो विभाग मंत्रियों के पास रहे थे, उनमें बदलाव न किया जाए। इसकी सबसे अहम वजह मंत्रियों द्वारा अपने विभागों में चलाई जा रहीं योजनाएं एवं कार्यक्रम मानी जा रही है, जिनके बारे में उन्हें पूरी जानकारी है। मंत्रालय बदले जाने से योजनाओं को धरातल पर लागू करने में दिक्कत पैदा हो सकती थी।
इसे युवा मुख्यमंत्री की रणनीति माना जा सकता है कि उन्होंने अहम माने जाने वाले विभागों का मोह नहीं किया और अपने पास केवल एक दर्जन विभाग ही रखे। उन्होंने अपने हिस्से के लोनिवि, ऊर्जा, आबकारी विभाग वरिष्ठ मंत्रियों में बांट दिए। इसके पीछे एक वजह मिशन 2022 की चुनौती भी मानी जा रही है।
धामी के पास काम करने के सिर्फ चार से पांच महीने हैं। इस दौरान उन पर जनता के बीच अपनी अलग छवि बनाने का भी दबाव है। जानकारों का कहना है कि अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी अपने वरिष्ठ मंत्रियों पर डालकर धामी फील्ड में खुलकर खेलना चाहते हैं।
धनसिंह का कद बढ़ा पर दोहरी चुनौती
धामी कैबिनेट में मंत्री डॉ.धनसिंह रावत को स्वास्थ्य मंत्रालय देकर उनका कद बढ़ाया गया, लेकिन कोविड-19 महामारी के समय स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके लिए बड़ी चुनौती भी होगी। उनके पास आपदा प्रबंधन मंत्रालय भी है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इन दोनों विभागों की बहुत अहमियत है और इनसे जनता की उम्मीदें बहुत ज्यादा जुड़ी हैं।
तो यतीश्वरानंद को मिला करीबी का फायदा
कैबिनेट मंत्री यतीश्वरानंद को ग्राम्य विकास मंत्रालय दे दिया गया है। तीरथ मंत्रिमंडल में उनके पास यह मंत्रालय नहीं था। माना जा रहा है कि यतीश्वरानंद को मुख्यमंत्री का करीबी होने का फायदा मिला है।
चुफाल को नहीं मिला अतिरिक्त विभाग
युवा चेहरे को सत्ता की कमान सौंपने के बाद जिन वरिष्ठ नेताओ की नाराजगी की चर्चाएं हवा में तैर रही थीं, उनमें एक नाम बिशन सिंह चुफाल का भी था। नाराज नेताओं के हिस्से में अहम विभाग भी आए। हालांकि चुफाल इससे इनकार करते रहे। विभागों के आवंटन में चुफाल के हिस्से बाकी नेताओं की तरह कोई अतिरिक्त अहम विभाग नहीं आ सका।