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तुंगनाथ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की तैयारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव
Thu, 10 Dec 2020 12:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 10 Dec 2020 12:33 PM IST
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तुंगनाथ मंदिर
- फोटो : File Photo
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पंच केदारों में शामिल भगवान तुंगनाथ मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की तैयारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसका प्रस्ताव केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजा है। साथ ही रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन से मंदिर से जुड़े राजस्व अभिलेखों की जानकारी मांगी गई है।
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तुंगनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 3460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित मंदिर है। देश-विदेश से श्रीकेदारनाथ धाम और श्रीबद्रीनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु तुंगनाथ धाम भी आते हैं।
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करीब एक हजार साल पुराने मंदिर को अब राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की तैयारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून मंडल के प्रभारी व वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. आरके पटेल ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय की अनुमति मिलने के साथ ही भगवान तुंगनाथ मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया जाएगा।
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स्कंद पुराण में है वर्णन
देवभूमि के पंचकेदारों का उल्लेख स्कंद पुराण के केदारखंड में मिलता है। स्कंद पुराण के मुताबिक प्रथम केदार भगवान श्री केदारनाथ हैं। उनकी 12वें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा की जाती है। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वरनाथ, तृतीय भगवान तुंगनाथ, चतुर्थ भगवान रुद्रनाथ और पंचम केदार भगवान कल्पनाथ हैं। उन्हें कल्पेश्वर नाथ के नाम से भी जाना जाता है।
पांडवों ने की थी पंच केदारों की स्थापना
पुराणों में वर्णित है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने प्रायश्चित करने व भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए हिमालय की यात्रा की। भगवान तुंगनाथ का मंदिर स्थापित करने के बाद कठोर तपस्या की और उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिला। यह भी मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तुंगनाथ में ही तप किया था।