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उत्तराखंड: युवा कवियों को मंच दे रहा ‘ओपन माइक’, इंजीनियरिंग के छात्रों ने तैयार किया यह प्लेटफॉर्म

Mon, 23 Aug 2021 03:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून
रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 23 Aug 2021 03:47 PM IST
सार

खुशबू गैरोला और आयुष बगवाड़ी ने महज 22 साल की उम्र में युवा लेखकों के लिए ‘ओपन माइक’ नाम का प्लेटफॉर्म तैयार किया है ।

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uttarakhand news: Open Mic giving platform to young poets
ओपन माइक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

युवा पीढ़ी साहित्यिक और रचनात्मक प्रवृत्ति की है और आधुनिकता के दौर में युवाओं में साहित्य के प्रति लगाव ने ही शहर की संस्कृति को जिंदा रखा है।

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ऐसे ही सृजनात्मक विचारधारा के दो विद्यार्थियों आईटी पार्क निवासी खुशबू गैरोला और भाऊवाला के आयुष बगवाड़ी ने महज 22 साल की उम्र में युवा लेखकों के लिए ‘ओपन माइक’ नाम का ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है। 2018 में शुरु किए गए इस मंच को दोनों दोस्तों ने नाम दिया है ‘एटीट्यूडियस ग्रुप’। इसके कार्यक्रम में न सिर्फ देहरादून बल्कि अन्य जिलों के साथ ही बाहरी राज्यों के युवा वर्ग को भी अपने साथ जोड़ा। धीरे-धीरे हर लेखन के शौकीन हर उम्र वर्ग को ‘ओपन माइक’मिला और आज सात सौ से अधिक युवा इस मंच से जुड़ चुके हैं।
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आयुष और खुशबू बताते है कि ‘एटीट्यूडियस’ ग्रुप नाम रखने के पीछे खास वजह है। इसकी पंच लाइन है एटीट्यूड विद टैलेंट। दोनों ने बताया कि एटीट्यूड शब्द को लोग अलग ढंग से लेते है। जबकि इसका अर्थ हम समझते हैं कि कोई भी इंसान अपने काम के प्रति कैसा व्यवहार रखता है।
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दोनों ने बताया कि हमारे बहुत से ऐसे दोस्त है, जिनके अंदर अलग-अलग तरह का कोई न कोई टैलेंट है, लेकिन मंच पर आने से वे डरते हैं। और हमारा मानना था कि अगर आपके अंदर टैलेंट है तो इसे पॉजिटिव ढंग से पेश करें। इसलिए हमने से एटीट्यूडियस (एटीट्यूड विद टैलेंट) नाम दिया।

कवियों को दिया मंच

जब हमने पहला ओपन माइक कार्यक्रम किया था, तब हमने देखा कि कितने लोग ऐसे है जिन्होंने इतनी सुंदर कविताएं, गजलें लिखी है,लेकिन उन्हें आज तक मंच नहीं मिला था। इसलिए हमने इस प्लेटफॉर्म को बड़ा करने के बारे में सोचा।हमने युवा कवियों को एक मंच दिया है।
- खुशबू गैरेला

कुछ बड़ा करने की सोच
जब हमने ओपन माइक कार्यक्रम शुुरु किया था, तब अंदाजा भी नहीं था कि हमारे साथ ही इतने सारे युवाओं को इस मंच की जरूरत थी। इस मंच ने मुझे भी आत्मविश्वास दिया है। जब बड़ी संख्या में हमारे कार्यक्रमों में युवा पहुंचते है तो लगता है कि हम कुछ बड़ा कर रहे हैं।
- आयुष बगवाड़ी

‘नशे से जंग अल्फाज के संग’ अभियान का भी बने हिस्सा
दोनों दोस्तों की पहल की चर्चा होने लगी तो जिला प्रशासन व समाज कल्याण विभाग ने भी इसका संज्ञान लिया। दोनों युवा कवियों को नशा मुक्ति अभियान के लिए चुना गया। इसके बाद खुशबू और आयुष ने नशा मुक्ति के लिए ‘नशे से जंग अल्फाज के संग’ कार्यक्रम की सीरीज चलाई।

नशे से जंग अल्फाज के संग 0.2 का अप्रैल में आयोजन किया गया। खुशबू ने बताया कि इस दौरान 60 साल की एक बुजुर्ग महिला ने अपनी कविता पढ़ी, जो उन्होंने 11 साल की उम्र में लिखी थी। उन्होंने कविता के जरिए अपने गांव में नशे की उस स्थिति के बारे में बताया था।

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