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उत्तराखंड: नए राज्यपाल ने किए नानकमत्ता साहिब के दर्शन, कहा- सिख कौम और सैनिकों को मिला सम्मान 

Sun, 19 Sep 2021 10:48 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नानकमत्ता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नानकमत्ता Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 19 Sep 2021 10:48 PM IST
सार

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड उनका परिवार है। यहां का हर व्यक्ति उत्तराखंडी है। कहा कि ‘मैं गुरु महाराज के दर्शन करने आया हूं। जो इस तीर्थ स्थान पर आते हैं, भगवान उनकी हर कामना सुनते हैं।

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Uttarakhand News: New governor Gurmeet Singh visited Nanakmatta Sahib Gurudwara
नानकमत्ता गुरुद्वारे पहुंचे नए राज्यपाल गुरमीत सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के नए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ पहली बार उत्तर भारत के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के दर्शन करने पहुंचे। राज्यपाल ने कहा कि सच्चे पातशाह गुरुनानक देव जी के आशीर्वाद से उन्हें उत्तराखंड में संविधान की रक्षा करने का अवसर मिला है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राज्यपाल बनाकर सिख कौम और सैनिकों को सम्मान दिया है।

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रविवार को राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीहरमिंदर साहिब दरबार में मत्था टेककर अरदास की और पवित्र पंजा साहिब की परिक्रमा भी की। दर्शन करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड उनका परिवार है। यहां का हर व्यक्ति उत्तराखंडी है। कहा कि ‘मैं गुरु महाराज के दर्शन करने आया हूं। जो इस तीर्थ स्थान पर आते हैं, भगवान उनकी हर कामना सुनते हैं। यहां भौरा साहिब, पीपल साहिब, दूध वाला कुआं समेत सभी का आशीर्वाद लिया है।’
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 उन्होंने कहा कि सच्चे पातशाह गुरुनानक देव जी की 14 लाइन के मूल मंत्र के एक-एक शब्द में शक्ति है और सेवा का सबक सिखाता है। मूलमंत्र हम सबका बहुत ही अच्छा मार्गदर्शक है। कहा ‘मैंने अरदास कर आशीर्वाद मांगा है कि मैं उत्तराखंड के चारधाम, सिखों के पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब, रीठा साहिब, गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब और उत्तराखंड परिवार की सेवा कर सकूं। दसवें गुरु गोविंद सिंह साहिब ने निडर होकर जीने का तरीका सिखाया है। उनके ‘निश्चय कर अपनी जीत करूं’ के उपदेश में चुनौतियों का डटकर सामना करना सिखाया गया। इसी उपदेश पर चलकर उत्तराखंड के विकास और खुशहाली के लिए कार्य करूंगा। उन्होंने कहा ‘मेरा जन्म अमृतसर साहिब में हुआ और आज मेरी आत्मा यहां आकर धन्य हो गई है। यहां के लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरूंगा।’
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 बकौल राज्यपाल, वह सैनिक हैं। उत्तराखंड में हर परिवार से एक सैनिक है। मुख्यमंत्री भी सैनिक परिवार का हिस्सा हैं। उनके स्वर्गीय पिता शेर सिंह धामी उनके साथ थे। बनबसा में जब वह कमांडिंग अफसर रहा तो धामी के पिता हर महीने यहां उनसे मिलने आते थे। वाहे गुरु का आशीर्वाद उत्तराखंड और भारत पर बना रहे। सिख भाइयों के हजारों संदेश आए हैं, जो कह रहे हैं कि आप गवर्नर बने हैं तो हम बने हैं। राष्ट्रपति और पीएम ने सभी सिख और सैनिकों को सम्मान दिया है। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्यपाल के बनबसा कैंप में कमांडिंग अफसर रहने से उन्हें इस क्षेत्र से विशेष लगाव रहा है। यह उनकी विशुद्ध रूप से धार्मिक यात्रा है। यहां विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा, सितारगंज विधायक सौरभ बहुगुणा, किच्छा विधायक राजेश शुक्ला, रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल, भाजपा जिलाध्यक्ष शिव अरोरा, वरुण अग्रवाल, राजपाल सिंह, राजवीर सिंह, लक्खा सिंह, गुरजीत सिंह, सुखदेव सिंह, जगदीश जोशी, पलविंदर सिंह औलख आदि थे।

नानकमत्ता साहिब को बनाएं पांचवां धाम

गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधक कमेटी की ओर से प्रधान सिंह सेवा सिंह ने राज्यपाल गुरमीत सिंह को ज्ञापन देकर सिखों के ऐतिहासिक धाम गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब को प्रदेश का पांचवां धाम घोषित करने की मांग की। साथ ही राजस्व अभिलेखों में नानकमत्ता का नाम बदलकर नानकमत्ता साहिब दर्ज करने गुजारिश की। 

रविवार को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर प्रधान ने कहा कि उत्तराखंड गुरुओं, पीरों, साधू संतों की पवित्र तपोस्थली है। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब भी उत्तराखंड में श्री गुरुनानक देव जी व श्री गुरु हरगोविंद जी का चरणछोह प्राप्त प्रमुख सिख धार्मिक स्थल है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

इनके लिए नि:शुल्क भोजन, रात्रि विश्राम की व्यवस्था गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से की जाती है। राज्य में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को चार धाम की मान्यता देते हुए अनेक सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराती है। चार धाम की तर्ज पर नानकमत्ता साहिब को पांचवां धाम घोषित करके यहां भी वैसी ही सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। 

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