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नाबार्ड ने आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए बनाई 27160 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना
Wed, 30 Dec 2020 01:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 30 Dec 2020 01:18 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 27160 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना बनाई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इसमें कृषि क्षेत्र में 12648 करोड़ के ऋण वितरण की संभावना का आंकलन किया गया है।
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मंगलवार को सुभाष रोड स्थित एक होटल में नाबार्ड की ओर से आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार 2020 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और विशिष्ट अतिथि सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। जिसमें ऋण संभावनाओं में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज के समूहन पर फोकस किया गया। कृषि क्षेत्र के रोड मैप के आधार पर नाबार्ड ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 27160 करोड़ का ऋण लक्ष्य निर्धारित किया है।
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कार्यक्रम में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सिर्फ कृषि से किसानों की आय को दोगुना नहीं किया जा सकता है। इसके लिए मिश्रित खेती करने, कृषि के साथ एलाइड क्षेत्र की गतिविधियों का अपनाने, बिचौलियों को दूर रखने, उत्पादों की बेहतर ब्रांडिग व पैकेजिंग की जरूरत है। पहाड़ों में कृषि जोत छोटी और बिखरी हैं। ऐसे में क्लस्टर खेती करने की आवश्यकता है। सरकार प्रत्येक न्याय पंचायत में एक आईएमए विलेज विकसित कर किसानों के लिए आय के नए स्रोत्र सृजित करेगी।
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वहीं, स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने व बाजार की मांग के अनुसार खेती अपनानी होगी। उन्होंने नाबार्ड की योजना में ड्रिप सिंचाई योजना में गैप फंडिंग, फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए फैंसिंग व उत्पाद लागत को कम करने के लिए रोपवे को शामिल करने का सुझाव दिया। सेमिनार में किच्छा के विधायक राजेश शुक्ला, वित्त सचिव सौजन्या, उत्तराखंड कॉपरेटिव फेडरेशन के उपाध्यक्ष हयात सिंह मेहता, निबंधक सहकारी समितियां बीएम मिश्रा, अपर सचिव कृषि राम बिलास यादव, नाबार्ड के महाप्रबंधक भास्कर पंत, प्रबंधक आकांक्षा वाधवा, विकास कुमार जैन आदि मौजूद रहे।
वार्षिक ऋण लक्ष्य में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ.ज्ञानेंद्र मणि ने स्टेट फोकस पेपर व पीएलपी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए स्टेट फोकस पेपर में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज का समूहन विषय पर फोकस किया गया।
उन्होंने सरकार व बैंकों से नाबार्ड के पास उपलब्ध विभिन्न निधियों, आरआईडीएफ के अतिरिक्त एलटीआईएफ, सूक्ष्म सिंचाई, डेयरी प्रोसेसिंग, नीडा, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, वाटरशैड, एआईएफ, वित्तीय समावेशन के विभिन्न उत्पाद, जलवायु परिवर्तन, ग्राम्य विकास निधि का अधिक से अधिक उपयोग करने का आग्रह किया। पिछले साल की तुलना में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ऋण लक्ष्य 10 प्रतिशत अधिक है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के समन्वयक डीपी भट्ट ने स्टेट फोकस पेपर में निर्धारित ऋण लक्ष्य पर मिलकर कार्य करने और केसीसी के माध्यम से किसानों तक समय पर ऋण पहुंचाने के लिए बैंकों से आग्रह किया। वीर चंद गढ़वाली बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.एके कर्नाटक ने उत्तराखंड के पहाड़ों से हर वर्ष हो रहे उपजाऊ मिट्टी के कटाव को रोकने पर मिलकर कार्य करने पर जोर दिया।
सिक्किम के आर्गेनिक मॉडल को अपनाने की जरूरत
भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि नाबार्ड ने स्टेट फोकस पेपर को काफी मेहनत से तैयार किया है। जो योजनाओं का जिक्र किया गया है, उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सभी बैंकों व एलडीएम की है। उन्होंने कहा कि किसानों का हित ही देश हित है, उन्होंने कृषि में क्रेडिट बढ़ाने पर बल दिया। सिक्किम के आर्गेनिक मॉडल को अपनाकर उत्तराखंड को भी जैविक के क्षेत्र में काम करने का सुझाव दिया।