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Uttarakhand: एनडीएमए के साथ हुई बैठक, पीडीएनए के आकलन के आधार पर केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी
Fri, 12 Sep 2025 09:54 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 12 Sep 2025 09:54 PM IST
सार
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के विभागाध्यक्ष व सदस्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि आकलन पुनर्निर्माण, आर्थिक सहायता, दीर्घकालिक योजना और जोखिम न्यूनीकरण के लिए अत्यंत जरूरी है।
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एनडीएम की बैठक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के विभागाध्यक्ष व सदस्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि आपदा के बाद व्यवस्थित आकलन आवश्यक है ताकि क्षति, प्रभावित लोगों की संख्या, बुनियादी ढांचे की स्थिति, आजीविका पर प्रभाव आदि का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके। पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) के लिए टीम उत्तराखंड आएगी। पीडीएनए के वास्तविक क्षति के आकलन के आधार पर केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
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यह बात एनडीएमए विभागाध्यक्ष सिंह ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में आपदा प्रबंधन विभाग के साथ हुई बैठक में कही। उन्होंने कहा कि यह आकलन पुनर्निर्माण, आर्थिक सहायता, दीर्घकालिक योजना और जोखिम न्यूनीकरण के लिए अत्यंत जरूरी है। एनडीएमए उत्तराखंड को आपदा सुरक्षित राज्य बनाने के लिए हर स्तर पर सहयोग को तैयार है। उन्होंने नदी किनारे बसे कस्बों की मैपिंग कर रिस्क असेसमेंट करने को कहा, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा सके और समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।
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आपदाओं के कारण न हो पलायन
विभागाध्यक्ष सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में आपदाओं के कारण लोगों का पलायन न हो इसके लिए व्यापक कार्य योजना बनाई जाए। यह केवल आजीविका का प्रश्न नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी आवश्यक है। राज्य की सीमावर्ती स्थिति, पर्यटन पर निर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने राज्य में स्थित शोध संस्थानों के साथ समन्वय करने पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में कई वैज्ञानिक संस्थान मौजूद हैं, जिनके अनुभव, तकनीकी संसाधनों और डेटा का उपयोग कर आपदा पूर्व तैयारी को मजबूत किया जा सकता है।
अनुभवों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करें
एनडीएमए के विभागाध्यक्ष सिंह ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन को राहत एवं बचाव कार्यों में आई चुनौतियों और अपने अनुभवों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने को कहा। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में मिली सीख को भविष्य की नीति बनाने, प्रशिक्षण, संसाधन योजना और तकनीकी सुधार के लिए अपनाया जाना चाहिए। दस्तावेजीकरण से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और अन्य राज्यों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल तैयार होगा। बैठक में अपर सचिव आपदा प्रबंधन आनंद स्वरूप आदि मौजूद थे।