{"_id":"60dc1c273cb160403534b588","slug":"uttarakhand-news-lives-are-in-danger-due-to-dilapidated-bridges-in-state","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड 13 जिले 13 रिपोर्टर : प्रदेश में जर्जर पुलों से जान जोखिम में, कई पुल तो अंग्रेजों के जमाने के","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड 13 जिले 13 रिपोर्टर : प्रदेश में जर्जर पुलों से जान जोखिम में, कई पुल तो अंग्रेजों के जमाने के
Wed, 30 Jun 2021 01:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 30 Jun 2021 01:42 PM IST
सार
राजधानी दून और आसपास के इलाकों में तीन दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े पुल जर्जर हालत में हैं। मानसून सीजन की शुरूआत के साथ ही कई पुलों को नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
राजधानी में तीन दर्जन से ज्यादा खतरनाक पुल
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुल, पुलिया उत्तराखंड की जीवनरेखा हैं। लेकिन प्रदेश के हर जिले में बड़ी संख्या में ऐसे पुल और पुलिया हैं जिनकी हालत बेहद खराब है। इनसे गुजरना जान हथेली पर लेने के बराबर है। कई पुल तो अंग्रेजों के जमाने के हैं। कई पर काम हो भी रहा है लेकिन मंथर गति से। मानसून सीजन चल रहा है। इन पर तेजी से काम करने की जरूरत है। ऐसा नहीं किया गया तो उत्तराखंड को हादसों के प्रदेश का तमगा बरकरार रहेगा।
विज्ञापन
देहरादून : राजधानी में तीन दर्जन से ज्यादा खतरनाक पुल
राजधानी दून और आसपास के इलाकों में तीन दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े पुल जर्जर हालत में हैं। मानसून सीजन की शुरूआत के साथ ही कई पुलों को नुकसान हो चुका है। बड़ासी, भोपालपानी जैसे बड़े पुलों की एप्रोच रोड और पुस्तों को नुकसान पहुंचा है। उसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में ऐसे पुल हैं, जो खतरनाक बने हुए हैं। बांदल घाटी, रायपुर व मालदेवता के ग्रामीण क्षेत्रों, मसूरी से लगे इलाकों, रानीपोखरी, डोईवाला व ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे कई पुल हैं। चकराता, त्यूणी, कालसी, विकासनगर इलाकों में करीब एक दर्जन से ज्यादा पुल हैं, जिन पर लोग खतरा मोल लेकर आवाजाही कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार पूरे जिले में तीन दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े पुल हैं, जो नुकसान के कारण पूरी तरह असुरक्षित बने हुए हैं।
विज्ञापन
चमोली : एक दर्जन से अधिक पुल खस्ताहाल
चमोली जिले में करीब एक दर्जन पुल या तो जर्जर हालत में हैं या टूट चुके हैं। घाट ब्लॉक के सलबगड़ में नंदाकिनी नदी पर तागला-बुरा को जोड़ने वाला हल्का मोटर पुल जर्जर हालत में है। लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। पोखरी ब्लॉक में बामनाथ गदेरे पर बना पुल 2018 में टूट गया था। यह नैल ऐथा से जीआईसी नैल सांकरी जाने का मुख्य मार्ग है। वहीं, आलीशाल और डामक ग्राम सभा और राइंका देवीखेत के बीच बनी डाट पुलिया तीन साल पहले क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके अलावा मलारी के पास बुरांस नामक स्थान पर, चाई और थैंग जाने के लिए गिवाली गदेरे में और टोलमा-सुराई थोटा मार्ग पर लामा गदेरे में पैदल पुल जर्जर हो चुके हैं
विज्ञापन
नई टिहरी: खस्ताहाल हैं चार पुल
टिहरी जिले में प्रतापनगर के चौंधार, बूढ़ाकेदार और छतियारा मार्ग पर जखोलना गदेरे में बनाए गए मोटर वाहन पुल की स्थिति खस्ताहाल बनी हुई है। पिलखी पुल भी जर्जर स्थिति में है। जिससे लोगों को इन पुलों से जोखिमभरा सफर करना पड़ रहा है। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता जीसी आर्य का कहना है कि विभाग के पास 144 मोटर वाहन और 10 पैदल पुल हैं। उनमें से गजा मार्ग के किमी 57 पर बनाए गए आर्च पुल की मरम्मत कार्य चल रहा है। जबकि अन्य सभी पुल ठीक स्थिति में है। भिलंगना ब्लाक के कोटी-झाला और तेड़ में निर्माणाधीन मोटर पुल का कार्य दो साल से पूरा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बरसात में खतरे के साए में उफनता गदेरा पार करना पड़ रहा है। संवाद
रुद्रप्रयाग : बेलणी पुल खतरनाक
केदारनाथ और केदारघाटी सहित तल्लानागपुर क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला 60 के दशक में निर्मित बेलणी मोटर पुल जर्जर हो चुका है। लंबे समय से पुल की उचित मरम्मत नहीं होने से इसकी हालत नाजुक बनी हुई है। दोनों छोर पर पुल झुक गया है। वहीं, निचली तरफ लगे गार्डर जंग से खराब हो चुके हैं। इसे देखते हुए पुल से बड़े वाहनों को एक-एक कर गुजारने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए दोनों तरफ ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। दूसरी तरफ रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा में बसुकेदार क्षेत्र को जोड़ने वाले मोटर पुल, सौड़ी, चंद्रापुरी और कुंड में भी मोटर पुलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दूसरी तरफ अगस्त्यमुनि के भीरी में काकड़ागाड़ में पुलिया हादसों को न्योता दे रही है। वहीं, राजमाता झूला पुल की स्थित भी दयनीय बनी है।
उत्तरकाशी: गंगोत्री हाईवे पर स्वारीगाड़ पर बना पुल खस्ताहाल
गंगोत्री हाईवे पर स्वारीगाड़ पर बना वैली ब्रिज जर्जर हाल में है। यहां बना पुल वर्ष 2012 की बाढ़ में बह गया था। जिसके बाद यहां अस्थाई वैली ब्रिज का निर्माण किया गया, जो खस्ता हालत में पहुंच चुका है। लेकिन जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूरी पर स्वारीगाड़ पर नए पुल का निर्माण उत्तरकाशी से आगे ऑलवेदर रोड़ चौड़ीकरण कार्य रुकने से लटका हुआ है। जबकि चारधाम यात्रा के साथ भारत-चीन सीमा के लिए पहुंच मार्ग पर इस पुल का निर्माण सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पौड़ी : फिलहाल पुलों की स्थिति कामचलाऊ
पौड़ी। जनपद पौड़ी में सभी पुलों की स्थिति ठीक है। जिलाधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि जनपद में मानसून सीजन को देखते हुए सभी पुलों का निरीक्षण करवा लिया गया है। आपदा की दृष्टि से कोई भी पुल संवेदनशील नहीं है।
हरिद्वार : जर्जर हाल में अंग्रेजों के जमाने के पुल (फोटो)
अंग्रेजों के जमाने के पुल जर्जर हो चुके हैं। गिरासू पुलों को मरम्मत कर चलाया जा रहा है। आज तक पुनर्निर्माण नहीं होने से बरसात के दिनों में हादसे का अंदेशा बना रहता है। गंगनहर के ऊपर डामकोठी और सिंहद्वार के पास अंग्रेजों के समय के बने पुल हैं। डामकोठी के पुल को पिछले कुंभ से एहतियात बंद कर दिया गया था। सिंहद्वार के पास अंग्रेजों के बनाए पुल के बराबर में ही नया पुल बना है। लेकिन पुराने पुल से अभी भी वाहनों का आवागमन होता है। धनौरी में भी गंगनहर पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। अब इसे फिर से मरम्मत कर खोल दिया गया है, जबकि जर्जर पुल से गुजरने वाले वाहनों से कभी भी हादसा हो सकता है।
अल्मोड़ा : जर्जर गुजरना हुआ मुश्किल
जिले में आधा दर्जन से अधिक मोटर और पैदल पुल जर्जर हैं। कुछ पुल औसत 50 साल की उम्र पार कर चुके हैं। अल्मोड़ा और नैनीताल जिले को जोड़ने वाला 1963-64 में बना क्वारब पुल भी बदहाल है। सेराघाट मार्ग पर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले को जोड़ने वाला सरयू नदी पर बने पुल की टिन की चादरें गल गई हैं। द्वाराहाट में दूनागिरि मार्ग पर 1971 में बने पुल के पिलर की दीवर भी ठीक स्थित में नहीं है। कैड़ारौ घाटी में बिंता मुख्य रोड से क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले पुल के अपार्टमेंट की दीवार टूट गई है। चौखुटिया ब्लाक में 1913 में निर्मित नौगांव-आखोड़िया झूला पुल भी खस्ताहाल है। जैंती तहसील में तल्ला और मल्ला सालम को जोड़ने वाले ल्वाली पैदल पुल के भी पांच दशक पुराना होने से स्थिति ठीक नहीं है, जबकि सोमेश्वर तहसील में ग्राम पंचायत कांटली में कोसी पर बना सीसी पुल तीन साल से ध्वस्त है।
पिथौरागढ़ : पांच पुल ध्वस्त
आपदा से मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसील क्षेत्र में पांच पुल ध्वस्त हो गए हैं। इनमें सोबला में बना कंज्योती और दारमा घाटी को जोड़ने वाला पक्का पुल और सोबला में सीपीडब्लूडी का सीमेंट का अस्थाई पुल भी शामिल है। बीते दिनों हुई बारिश से करीब 11 अस्थायी पुल और चार ट्रालियां बह गई हैं। जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर सैंथल के पास बीआरओ का बैली ब्रिज खतरे की जद में है। दराती-मतियाली सड़क में लोनिवि का पक्का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
चंपावत : जोखिम भरा है मल्ला टाक पुल पर चलना
चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क का निर्माण हो रहा है। इस वजह से यहां जिले की सबसे प्रमुख सड़क पर पुराने पुलों के स्थान पर नए पुलों का निर्माण किया गया है। इस वक्त एनएच पर चल्थी का एक पुल निर्माणाधीन है। जिले में एक पैदल पुल जर्जर हालत में है। मां पूर्णागिरि क्षेत्र में मल्ला टाक में 2007 में बना यह पैदल पुल 22 फीट लंबा है। इससे गुजरना जोखिम भरा है। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि इस स्थान पर नए पुल के निर्माण की कवायद चल रही है। (संवाद)
बागेश्वर : तीन साल बाद भी नहीं बना झूलापुल
बागेश्वर जिले में सभी मोटर पुलों की स्थिति सही है, लेकिन जिले के भकूना को पिथौरागढ़ के नाचनी से जोड़ने वाला झूलापुल तीन साल पहले आपदा में ध्वस्त हो गया था। उसके स्थान पर मोटर पुल का प्रस्ताव बनाया गया, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ है। पुल न बनने से लोगों को ट्राली के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। वहीं कपकोट के नौकोड़ी में बने पैदल पुल का बेसमेंट क्षतिग्रस्त हो गया है। यह पुल नौकोड़ी समेत पांच गांवों को जोड़ता है। लोनिवि के अधिकारी आपदा मद से पुल की मरम्मत कराने की बात कह रहे हैं।
फोटो 29 बीजीएस 11, 12 पी
नैनीताल : घिरोली गदेरे पर बने पुल की दशा खराब
नैनीताल। बेतालघाट के रातीघाट मोटर मार्ग पर घिरोली गधेरे पर बने पुल की दशा बेहद खराब है। पुल के बीच में झुकाव हो गया है। शासन ने इस पुल के पास नया पुल बनाने की मंजूरी दे दी है। एशियन डेवलपमेंट बोर्ड (एडीबी) के अधिशासी अभियंता जनार्दन पांडे ने बताया कि नया पुल 5.60 करोड़ की लागत से बन रहा है। पिलर बनाने का काम शुरू हो चुका है। भीमताल-रानीबाग में यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए लोनिवि रानीबाग में पुराने पुल के पास ही टू लेन पुल बना रहा है।
ऊधमसिंह नगर : मानसून से पहले पीडब्लूडी के सभी 120 पुलों की हो चुकी है मरम्मत
रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में मानसून को देखते हुए लोक निर्माण विभाग सतर्क है। जिले में लोक निर्माण के सभी 120 पुलों की स्थिति ठीक है। रुद्रपुर के आजाद नगर में 36 मीटर लंबा पुल कई साल से जर्जर था, विभाग ने पिछले साल ढाई लाख रुपये से इसकी मरम्मत करवाई थी। लोनिवि के इंजीनियर मनोज दास का कहना है जिले में सभी 120 पुलों की हालत बेहतर है। कोई भी पुल खतरे की जद में नहीं है। (संवाद)