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उत्तराखंडः कुकर्म के बाद मासूम दिव्यांग के हत्याभियुक्त को सुनाई गई फांसी की सजा
Sun, 07 Mar 2021 11:14 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 07 Mar 2021 11:14 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कुकर्म के बाद मासूम दिव्यांग के हत्याभियुक्त को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। बेटे का अपराध छिपाने पर दोषी के पिता को धारा 201 में चार साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने, जबकि मां को धारा 201 में तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दोषी ने मासूम की हत्या के बाद उसके शव को बोरे में छिपा दिया था।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विकास गुप्ता ने बताया कि 19 फरवरी 2019 को ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में पांच साल का दिव्यांग लापता हो गया था। 21 फरवरी को उसके परिजनों ने ट्रांजिट कैंप पुलिस थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया था।
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उसी रात परिजनों ने एक और तहरीर दी थी, जिसमें कहा गया कि उनके बेटे के लापता होने के बाद पड़ोसी हरस्वरूप, उसके पिता पप्पू और मां रूपवती के व्यवहार में बदलाव आया है। मासूम के परिजनों ने बताया कि उनकी छत पर आधी रात को आहट सुनाई दी तो उन्होंने छत पर जाकर देखा कि हरस्वरूप पानी की टंकी का ढक्कन खोल रहा था।
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उन्हें देखकर वह भाग गया। परिजनों के शक जताने पर पुलिस ने हरस्वरूप से सख्ती से पूछताछ की तो उसकी निशानदेही पर उसके कमरे से एक बोरे में मासूम का शव बरामद हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम की गला दबाकर हत्या एवं कुकर्म की पुष्टि हुई थी। उसके शरीर पर चोट के निशान मिले थे।
मामले में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए। स्पेशल जज पॉक्सो विजय लक्ष्मी विहान ने हरस्वरूप को दोषी मानते हुए धारा 364 में उसे सात साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने, धारा 201 में छह साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने, छह पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।