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उत्तराखंड : प्रमोशन न होने पर विभागाध्यक्षों के घेराव की चेतावनी, माननीयों की पेंशन को लेकर उठाए सवाल

Sat, 20 Jun 2020 11:42 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 20 Jun 2020 11:42 AM IST
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Uttarakhand news:  if not promotioned employees Warning of siege of the heads of departments
प्रतीकात्मक तस्वीर

राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद ने एक जुलाई से उन विभागाध्यक्षों का घेराव करने की चेतावनी दी है, जिनके महकमों में कर्मचारियों के प्रमोशन नहीं किए जा रहे हैं। परिषद की हाईपावर कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया है। तय हुआ है कि 30 जून तक यदि विभागीय अफसरों ने प्रमोशन के आदेश नहीं किए तो उनके खिलाफ घेराव का अभियान छेड़ दिया जाएगा।

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आनलाइन बैठक में परिषद नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रमोशन के मामले में विभागाध्यक्षों का रवैये बेहद नकारात्मक हैं। शासन के आदेश के बावजूद कई विभागों में कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं की गई।
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उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पशुपाल, आयुर्वेद,  होम्योपैथी, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, जिला पंचायत, आबकारी, अर्थ एवं संख्या, श्रम, वाणिज्य कर, खाद्य एवं आपूर्ति, आरएफसी, तहसील, पर्यटन, मनोरंजन कर, रजिस्ट्री एवं स्टांप, खनन एवं भूतत्व खनिकर्म, वन, एनसीसी,  कृषि, उद्यान, बाल विकास, रेशम, मंडली परषिद, आईटीआई, टाउन प्लान, जनजाति आईटीआई, लघु सिंचाई, आरईएस, पालिटेक्निक, सूचना विभाग समेत कई अन्य विभागों में कर्मचारियों के प्रमोशन लटके हैं।
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बैठक में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। परिषद नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों (माननीयों) की तो दो-दो पेंशन लग जाती हैं, लेकिन वर्षों सेवा करने वाले कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बंद कर दी गई है। सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गई। तय हुआ कि 21 जून से पेंशन बहाली के घोषित आंदोलन में परिषद शामिल होगा। जरूरत पड़ने पर ब्लाक, तहसील व जनपद स्तर पर परिषद से जुड़े कर्मचारी लामबंद होंगे।

बैठक में वन विभाग, राजाजी पार्क व रिजर्व टाइगर में कर्मचारियों को छह महीने से वेतन न मिलने का मुद्दा भी उठा। कहा गया कि कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैठक में 1800, 1900 व 2000 ग्रेड पे के अल्प वेतन भोगी कार्मिक को स्टापिंग पैटर्न का लाभ देने की मांग उठी। कहा गया कि उनके प्रमोशन अवसर भी नहीं हैं। 

परिषद नेताओं ने अटल आयुष्मान योजना की कमेटी पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। कहा गया कि परिषद से वार्ता में ओपीडी छूट व रेफरल की अनिवार्यता समाप्त करने का समझौता हुआ था। लेकिन शासनादेश इसके ठीक उलटा जारी हुआ। ओपीडी को कैशलेस नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में रोष है।


वेतन और पेंशन में कटौती को लेकर भी सवाल उठा। कहा गया कि कम वेतन वाले कर्मचारियों से अधिक वेतन वाले अधिकारियों के समान ही कटौती की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। आनलाइन बैठक में ठाकुर प्रहलाद सिंह, नंद किशोर त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, अरुण पांडेय, गुड्डी मटूड़ा, राकेश प्रसाद ममगाईं, रेणु लांबा, दिशा बडोनी, एसपी सेमवाल, सुनील देवली, हरेंद्र रावत, संदीप पांडे, राम सलौने, अनिल बांगा, इंद्रमोहन कोठारी, भोपाल सिंह शामिल हुए।

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