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उत्तराखंडः देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में सुनवाई अब 27 को 

Wed, 07 Jul 2021 12:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 07 Jul 2021 12:34 PM IST
सार

राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी की 17 अक्तूबर 2010 को निर्मम हत्या कर दी थी और शव को छुपाने के लिए उसने शव के 72 टुकड़े कर डीप फ्रिज में डाल दिया था।

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uttarakhand news : hearing in dehradun famous anupama gulati murder case now on 27 july
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में राजेश गुलाटी की ओर से दायर अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए  27 जुलाई की तिथि नियत की है। 

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मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी की 17 अक्तूबर 2010 को निर्मम हत्या कर दी थी और शव को छुपाने के लिए उसने शव के 72 टुकड़े कर डीप फ्रिज में डाल दिया था। 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई दिल्ली से देहरादून आया तो हत्या का खुलासा हुआ।
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देहरादून कोर्ट ने राजेश गुलाटी को 1 सितंबर 2017 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इस घटना को जघन्य अपराध की श्रेणी में माना। राजेश गुलाटी पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और 1999 में लव मैरिज की थी। राजेश गुलाटी ने इस आदेश को हाइकोर्ट में 2017 में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से  इलाज के लिए अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया गया था।
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हाईकोर्ट का सरकार को जवाब देने का अंतिम अवसर दिया

नैनीताल हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2005 बैच के कांस्टेबलों को नई पेंशन स्कीम में शामिल करने के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को अंतिम अवसर देते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मामले में कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी समय दिया था लेकिन अभी तक जवाब पेश नहीं किया गया है। सरकार जान बूझकर इस मामले को लटका रही है।

 न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पुलिस विभाग में कार्यरत गुरमीत कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह पुलिस विभाग के कांस्टेबल के पद पर 22 अक्तूबर 2005 में भर्ती हुए थे। सरकार ने 25 अक्तूबर 2005 को नई पेंशन स्कीम जारी कर दी।


इस स्कीम में कहा गया है कि यह स्कीम पुराने बैच के कर्मचारियों पर भी लागू होगी। इस स्कीम को उन्होंने अपनी याचिकाओं में चुनौती देते हुए कहा कि यह स्कीम उन पर लागू नहीं हो सकती क्योंकि उनकी नियुक्ति शासनादेश जारी होने से पहले हो चुकी है, इसलिए उनको पुरानी पेंशन स्कीम का ही लाभ मिलना चाहिए।

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