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चमोली आपदाः सुरंग में सख्त चट्टानें बढ़ा रही हैं बचाव दल की दिक्कत
Thu, 11 Feb 2021 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 11 Feb 2021 06:54 AM IST
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chamoli disaster
- फोटो : अमर उजाला
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एनटीपीसी की 520 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान की राह में अब मजबूत चट्टानें चुनौती बन गई हैं। इन चट्टानों को हटाना आसान काम नहीं है। विस्फोटक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे सुरंग को खतरा हो सकता है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश के मुताबिक, बाढ़ के पानी और सिल्ट के साथ ये चट्टानें सुरंग में पहुंची हैं। इस कारण अभियान की गति पहले दो दिन की तुलना कुछ में धीमी है।
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बुधवार को मुख्य सचिव ने चमोली आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी, सचिव गृह नीतेश कुमार झा, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन व अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रोजेक्ट की टनल में चल रहे बचाव अभियान की राह में बड़ी और मजबूत चट्टानें चुनौती बन गई हैं। इस कारण सुरंग में 180 मीटर तक तेज रफ्तार से चले अभियान की गति कुछ धीमी पड़ी है। टनल से मलबा हटाने के बाद अब चट्टानों को तोड़ने की तरकीब तलाशी जा रही है। इन पत्थरों को तोड़ने के लिए विस्फोटक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि टनल अभी कच्ची और आरंभिक चरण में है।
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25 से 35 लोगों के फंसे होने की संभावना
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक, तपोवन में टनल मे फंसे लोगों का रेस्क्यू जारी है। यहां पर करीब 25 से 35 लोग टनल मे फंसे हैं जिनको बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ के 100, एनडीआरएफ के 176, आईटीबीपी के 425 जवान, एसएसबी की एक टीम, सेना के 124 जवान, सेना की दो मेडिकल टीम, स्वास्थ्य विभाग की चार मेडिकल टीमें और फायर विभाग के 16 फायरमैन, लगाए गए हैं।
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टनल में रेस्क्यू आपरेशन चल रहा है। आपरेशन में 180 मीटर तक गाद हटाई जा चुकी है। आपरेशन की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है क्योंकि टनल में बड़े बड़े बोल्डर हैं।
- ओम प्रकाश, मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन