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उत्तराखंड: अब घर बैठे उठेगा कूड़ा और निर्माण का मलबा, ऑनलाइन करना होगा आवेदन
Mon, 26 Jul 2021 03:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 26 Jul 2021 03:50 PM IST
सार
डिजिटल इंडिया के दौर में शहरी विकास निदेशालय अपनी सेवाओं को लगातार ऑनलाइन मोड में ला रहा है। अभी तक हाउस टैक्स जमा कराने की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है।
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विस्तार
अगर आपको अपने घर का कूड़ा उठवाना है तो आप ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वेंडर को अपना आईकार्ड बनवाना हो या निर्माण कार्यों से जुड़ा कचरा उठवाना हो। आने वाले समय में यह सभी काम घर बैठे ही हो जाएंगे। शहरी विकास निदेशालय ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
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डिजिटल इंडिया के दौर में शहरी विकास निदेशालय अपनी सेवाओं को लगातार ऑनलाइन मोड में ला रहा है। अभी तक हाउस टैक्स जमा कराने की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। कुछेक निकायों में प्रक्रिया गतिमान है। लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया भी निदेशालय ने ऑनलाइन कर दी है। अब करीब 18 सेवाओं को निदेशालय ऑनलाइन करने जा रहा है।
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इसके तहत वेंडर का आईकार्ड बनाने, वेंडिंग सर्टिफिकेट लेने के साथ ही सी एंड डी वेस्ट (कंस्ट्रक्शन व डिमोलिशन वेस्ट) को उठवाने का काम भी ऑनलाइन हो सकेगा। अगर आपका निर्माण या निर्माण को नष्ट करने के बाद का मलबा है तो वह सड़क पर इधर-उधर फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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सीधे ऑनलाइन आवेदन करेंगे और निगम या निकाय की टीम आकर उसे उठा लेगी। इसी प्रकार अगर आपके घर का कूड़ा नहीं उठ रहा है तो यह सेवा भी निदेशालय ऑनलाइन करने जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन करो और निगम की टीम आकर कूड़ा ले जाएगी। स्वच्छता समिति के पंजीकरण समेत ऐसी करीब 18 सेवाएं एनआईसी की मदद से जल्द ही ऑनलाइन हो जाएंगी।
निदेशालय के कार्यों के लिए बनेगी पीएमयू-पीआईयू
निदेशालय के स्तर से जो भी नए बदलाव किए जा रहे हैं, उसके लिए विशेषज्ञों की
प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट(पीएमयू) और प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन यूनिट(पीआईयू) टीमें बनाई जा रही हैं। इसके लिए शहरी विकास निदेशालय अलग से विशेषज्ञों को हायर कर रहा है। इससे सभी बदलावों को अमल में लाना आसान हो जाएगा।
हम कई सेवाएं ऑनलाइन कर चुके हैं। अब एनआईसी की मदद से करीब 18 और सेवाओं को ऑनलाइन करने जा रहे हैं। जल्द ही यह बदलाव लागू हो जाएंगे।
- कमलेश मेहता, संयुक्त निदेशक, शहरी विकास निदेशालय