उत्तराखंड: विलुप्त होते धारीदार लकड़बग्घा की खोज-खबर लेगा वन विभाग
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पर्यावरण और परिस्थितिकी तंत्र की एक अहम कड़ी धारीदार लकड़बग्घा समय के साथ विलुप्त हो रहा है। उत्तराखंड में इनकी उपस्थिति नाममात्र की रह गई है। इसको ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वन विभाग की अनुसंधान शाखा इस पर शोध करने जा रही है। चीफ वाइल्ड लाइफ वाडर्न की ओर से इसकी अनुमति प्रदान कर दी गई है। प्रारंभिक चरण में यह शोध राजाजी टाइगर रिजर्व की विभिन्न रेंज में किया जाएगा।
धारीदार लकड़बग्घा पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में ठीक वैसे ही काम करते हैं, जैसे गिद्ध। इसलिए इसे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि शोध का प्रारंभिक क्षेत्र 1075 वर्ग किलोमीटर में फैले राजाजी टाइगर रिजर्व (आरटीआर) के तीन वन्यजीव प्रभाग निर्धारित किए गए हैं। जिसमें राजाजी का मोतीचूर, चीला, शिवालिक और देहरादून पूर्वी वन प्रभाग शामिल है।
आईएफएस चतुर्वेदी ने बताया कि भारत में लकड़बग्घा की पारिस्थितिकी पर केवल कुछ ही अध्ययन किए गए हैं, जो गिर, सरिस्का और कच्छ के शुष्क पर्णपाती पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित हैं। हिमालय की तलहटी और तराई परिदृश्य जैसे नम पर्णपाती पारिस्थितिकी तंत्र में लकड़बग्घा पारिस्थितिकी के बारे में जानकारी का अभी भी अभाव है। इसके अलावा, भारत में अपनी सीमा में लकड़बग्घा बाघ, शेर और तेंदुए जैसे अन्य बड़े शिकारियों के साथ सह-अस्तित्व में है। कैसे लकड़बग्घा इन उच्चकोटि के शिकारियों के साथ रहकर अपने संसाधनों का बंटवारा कर रहा है, यह शोध का विषय है।
संकटग्रस्ट वन्यजीव प्राणियों की श्रेणी में शामिल है धारीदार लकड़बग्घा
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने धारीदार लकड़बग्घा को दुनिया के संकटग्रस्ट वन्यजीव प्राणियों की श्रेणी-तीन में रखा है। लेकिन इसके संरक्षण के लिए अभी तक कोई खास प्रयास नहीं किए गए हैं। न ही इसकी संख्या का कोई आधिकारिक अनुमान है।
भारत और अफ्रीका के अलावा धारीदार लकड़बग्घा 15 देशों में पाया जाता है। भारत ही नहीं दुनिया में इनकी संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। कुछ देशों में ये शिकार तो कहीं भोजन की कमी के कारण विलुप्त हो गए। भारत में लकड़बग्घा ज्यादातर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में हाल ही में नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पास धारीदार लकड़बग्घे का अभी तक मात्र एक अध्ययन उपलब्ध है, जो चीला रेंज में वर्ष 2010 में किया गया था। अध्ययन से पता चला था कि राजाजी में लकड़बग्घा बेहद सीमित क्षेत्र और संख्या में मौजूद है। अब जो हम अध्ययन करने जा रहे हैं, एक तो इसके क्षेत्रफल का दायरा बहुत बड़ा है। दूसरा इसमें लकड़बग्घा, बाघ और तेंदुओं के बीच के व्यवहार में आए परिवर्तन को भी रेखांकित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए हम कैमरा ट्रैप और दूसरे अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग करेंगे।
- संजीव चतुर्वेदी, मुख्य वन संरक्षक, अनुसंधान