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उत्तराखंड: प्रत्येक व्यक्ति का बनेगा आयुष्मान गोल्डन कार्ड - स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत
Fri, 16 Jul 2021 01:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 16 Jul 2021 01:26 PM IST
सार
स्वास्थ्य मंत्री ने अटल आयुष्मान योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना में अब तक 44 लाख लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं।
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धन सिंह रावत
- फोटो : facebook.com/drdhansinghrawat
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विस्तार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार आयुष्मान गोल्डन कार्ड के जरिये हर व्यक्ति को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगी। इसके लिए प्रदेश में सभी लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। योजना के तहत 60 दिनों में 70 लाख आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों को योजना में कैशलेस इलाज कराने में आ रहीं दिक्कतों का समाधान किया जाएगा। कर्मचारियों को एक छत के नीचे सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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सचिवालय सभागार में स्वास्थ्य मंत्री ने अटल आयुष्मान योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना में अब तक 44 लाख लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। बैठक में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष दिलीप कोटिया ने बताया कि सर्वाधिक आयुष्मान कार्ड जारी करने वाले राज्यों में उत्तराखंड देशभर में तीसरे स्थान पर है। जबकि छत्तीसगढ़ पहले और केरल दूसरे स्थान पर है।
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अब तक तीन लाख लोगों को योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई। योजना में प्रदेश के 205 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। जिसमें 102 सरकारी व 103 निजी अस्तपाल हैं। जबकि देशभर में 25 हजार अस्पताल पंजीकृत हैं। आयुष्मान कार्ड का लाभ सबसे अधिक डायलिसिस व कैंसर के मरीजों को मिला है। बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण अरुणेंद्र सिंह चौहान, निदेशक संजीव कुमार सिंह, डॉ.एके गोयल, अनुसचिव जसविंदर कौर, अनुभाग अधिकारी राकेश धर, स्टेट कोर्डिनेटर आईएसए अतुल जोशी आदि मौजूद थे।
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एक सप्ताह में शुरू करें बच्चों को माइक्रो न्यूट्रेंट का वितरण
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को देखते हुए एक सप्ताह के भीतर बच्चों को माइक्रो न्यूट्रेंट का वितरण शुरू कर दिया जाए। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला स्तर पर संक्रमित बच्चों के लिए आईसीयू, ऑक्सीजन बेड की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
सचिवालय सभागार में स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पतालों में डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलिंडर, कन्सट्रेटर, दवाईयों समेत अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने जिलाधिकारी से कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए जिला स्तर की जा रहीं तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की आशंका है।
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए माइक्रो न्यूट्रेंट की खरीद कर एक सप्ताह के भीतर वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, 15वें वित्त, एसडीआफएफ मद से कोरोना रोकथाम के लिए धनराशि आवंटित कर दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर और भी धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने कहा कि जिन चिकित्सालयों में भवन की कमी है, वहां पर प्री फैब्रिकेटेड ढांचे का निर्माण किया जा सकता है। जिसके लिए धनराशि दे दी गई है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि कोविड की रोकथाम संबंधी तैयारियों को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी अपने जिले के निजी अस्पतालों से भी सहयोग ले सकते हैं। इस मौके पर सचिव स्वास्थ्य डॉ.पंकज कुमार पांडेय, एनएचएम मिशन निदेशक सोनिका, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ.तृप्ति बहुगुणा, एनएचएम निदेशक डॉ.सरोज नैथाणी समेत सभी जिलों के डीएम और सीएमओ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।