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उत्तराखंड: 20 घंटे की माथापच्ची के बाद बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, सरकार ने लगाया था एस्मा

Tue, 27 Jul 2021 10:25 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 27 Jul 2021 10:25 PM IST
सार

14 सूत्री मांगों को लेकर यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के 10 संगठनों के करीब 3500 बिजली कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन चला रहे थे। 

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Uttarakhand News: Electricity corporations employees determined for Strike from today
हड़ताल पर ऊर्जा निगम के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब 20 घंटे की माथापच्ची के बाद आखिरकार बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी। यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कर्मचारियों का पारा चढ़ गया था। काफी मान मनोव्वल के बाद कर्मचारियों का गुस्सा ठंडा पड़ा और वे हड़ताल समाप्त करने पर राजी हुए।

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सरकार ने दोपहर में ही अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) के तहत तीनों निगमों में हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया था। सचिव ऊर्जा सौजन्या ने इसका आदेश जारी किया।
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उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 14 सूत्री मांगों को लेकर 3500 से ज्यादा बिजली कर्मचारियों ने मध्य रात्रि से हड़ताल शुरू कर दी थी। रातभर तो जैसे-तैसे आपूर्ति हुई, लेकिन सुबह होते ही प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति लड़खड़ाने लगी। देखते ही देखते राजधानी सहित प्रदेश के तमाम शहरों के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई। पहले एमडी स्तर पर बिजली कर्मचारियों की वार्ता चली, जो विफल हो गई। इसके बाद करीब तीन घंटे तक ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत से वार्ता हुई। वार्ता के बाद ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने सभी मांगों को पूरा करने के लिए एक माह का समय मांगा है। 

वार्ता के बाद मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक ने मीडिया के सामने हड़ताल स्थगित करने का एलान कर दिया। लेकिन इस पर कई संगठन असहमत होते हुए बाहर चले गए। इस असहमति के बवाल को थामने के लिए मोर्चा की बैठक दोबारा बुलाई गई। बैठक में कहा गया कि जब तक ऊर्जा मंत्री से बातचीत के मिनट्स लिखित में नहीं आएंगे, तब तक वह हड़ताल जारी रखेंगे। रात करीब साढ़े नौ बजे तीनों निगमों के एमडी के हस्ताक्षर हुए मिनट्स आए, जिस पर कर्मचारी नेताओं ने भी हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद हड़ताल पूर्ण रूप से स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। हड़ताल खत्म होते ही बिजली कर्मचारी अपने काम पर लौटने लगे। देर रात तक कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति सुचारु हो गई थी।
कई इलाकों में बिजली रही गुल
हड़ताल के बाद उत्तरकाशी में मंगलवार सुबह मनेरी भाली एक और मनेरी पाली दो की टरबाइन थमी गई। जिससे विद्युत उत्पादन ठप हो गया। वहीं, उत्तरकाशी के कई इलाकों में बिजली गुल है। वहीं, देहरादून में भी कई फीडर से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। दून के सभी बिजलीघरों में ताले लटके रहे। अधिकारियों के मोबाइल बंद रहे। उधर, बिजली कटने की वजह से लोग भी परेशान रहे। 

यह हैं ऊर्जाकर्मियों की मांगें

ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले 4 सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था तथा उपनल के माध्यम से कार्य कार्योजित कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य हेतु समान वेतन को लेकर लगातार सरकार से वार्ता कर रहे हैं। 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ परंतु आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इस बात से क्षुब्ध हैं कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रही थी। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी छेड़खानी की गई। संविदा कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन के विषय में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में इंसेंटिव एलाउंसेस का रिवीजन नहीं हुआ।

विधायक कपूर से मिले स्वयं सहायता समूह बिजली कर्मचारी
स्वयं सहायता समूह (एसएचजी उपभोक्ता सेवा समिति) के विद्युत कर्मचारियों ने विधायक हरबंस कपूर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विभाग को काफी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बहुत ही कम वेतन मिलता है, जिसमें आज के महंगाई के दौर में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। बिजली विभाग का कोई अधिकारी उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी काम के दौरान अपनी जान गवां चुके हैं, उनके परिजनों को भी उचित मुआवजा नहीं दिया जाता है। दिन रात सेवा दे रहे कर्मियों को अवकाश की भी सुविधा नहीं है। न ही ओवर टाइम दिया जाता है। कर्मचारियों ने विधायक से मांग की कि उनकी समस्याओं को वह सरकार तक पहुंचाएं। इस दौरान विनोद कुमार, निशिकांत सोनकर, रवि ध्यानी, विकास कुमार, विजय कुमार, अनादि उप्रेती, मधु सूधन, सुरेश चौधरी, अमित कुमार, दिनेश, छोटे लाल, मनीष आदि मौजूद रहे।

रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने दिया समर्थन
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की प्रांतीय कार्यकारिणी ने ऊर्जा निगम कर्मियों के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। यूनियन के प्रांतीय महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि ऊर्जा कर्मियों की 14 सूत्री मांगों का अध्ययन किया गया। यह पाया गया कि यह सभी मांगें बिल्कुल सही हैं। लिहाजा, उन्होंने भी बिजलीकर्मियों की हड़ताल को समर्थन दे दिया है। उन्होंने उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा को समर्थन संबंधी पत्र भेजा।

बिजली के साथ ही पानी के लिए तरसे कई क्षेत्रों के लोग

ऊर्जा निगम कर्मियों की हड़ताल से आमजन सुबह से देर रात तक बिजली के लिए तो तरसे ही, साथ ही पानी के लिए भी परेशान होना पड़ा। बिजली न होने के कारण जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल नहीं चल पाए। इससे शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की सप्लाई ठप हो गई। ऊर्जा कर्मियों की पूर्व घोषित हड़ताल के बाद भी जल संस्थान और जल निगम ने पानी की आपूर्ति के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। 

दरअसल, जल संस्थान और जल निगम के तमाम ट्यूबवेल ऊर्जा निगम के भरोसे चलते हैं। अधिकांश ट्यूबवेलों में जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। वहीं, सोमवार देर रात से ऊर्जा निगम कर्मियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिसका सीधा असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा। बिजली नहीं होने से जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल नहीं चल पाए। पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने किसी तरह से हैंडपंपों आदि के माध्यम से काम चलाया। देर रात तक भी बिजली आपूर्ति सूचारु नहीं हो पाई थी।

इन क्षेत्रों में रही ज्यादा दिक्कत 
शहरी क्षेत्र के घंटाघर, दिलाराम चौक, सुभाष रोड, डालनवाला, करनपुर, रायपुर रोड, नेहरू कॉलोनी क्षेत्र खुड़बुड़ा क्षेत्र, आरकेड़िया के प्रेमनगर, श्यामपुर,शुक्लापुर, बनियावाला, बड़ोवाला, अंबीबाला, मेेंहूवाला, नयागांव, माजरा, आईएसबीटी, क्लेमेनटाउन सहित कई क्षेत्रों में ज्यादा दिक्कत रही।

आज भी हो सकती है दिक्कत 
देर रात तक भी राजधानी के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई थी। लिहाजा ट्यूबवेल भी ठप रहे। इससे जलसंस्थान और जल निगम के ओवरहैड टैंक नहीं भर पाएंगे। इससे बुधवार को पेयजल की सप्लाई में दिक्कत होगी और लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ेगा।

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