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उत्तराखंड : महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी की टेंडर की फाइल सीएम के पास पहुंची
Tue, 29 Sep 2020 03:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 29 Sep 2020 03:53 PM IST
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : File Photo
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़ी टेंडर की फाइल मुख्यमंत्री के पास पहुंच गई है। राज्यमंत्री रेखा आर्य सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में फाइल लेकर पहुंची हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फाइल मंगाई है। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में मुख्यमंत्री के स्तर से आज कोई निर्णय हो सकता है।
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वहीं दूसरी ओर राज्यमंत्री रेखा आर्य ने अपने सभी विभागों के अधिकारियों की एसीआर रिपोर्ट तलब की है। लेकिन उन्हें अब तक एक भी रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। राज्यमंत्री का कहना है कि वर्ष 2017 से अब तक कितने अधिकारियों की एसीआर रिपोर्ट उनके पास आई है इसकी उन्हें जानकारी दी जाए।
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हर मंत्री को मिले एक सचिव : महाराज
सीआर की रार से सरकार बेशक मुक्त होना चाहती हो लेकिन इस रार के तार छेड़ने वाले कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज चुप बैठने वाले नहीं हैं। सचिवों की सीआर लिखे जाने के मुद्दे पर उनका सोमवार को नया बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि यदि सचिवों की सीआर को लेकर कोई तकनीकी दिक्कत है तो हर मंत्री को एक सचिव दे दिया जाए, जिसके पास मंत्री वाले सभी विभाग हों।
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महाराज ने यह बयान टीवी चैनल व सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। महाराज से जब मीडियाकर्मी ने सचिवों की सीआर को लेकर तकनीकी अड़चन के बारे में पूछा गया तो उनके पास इसका भी जवाब था। महाराज ने कहा कि सचिवों के पास अलग-अलग मंत्रियों के विभाग को लेकर यदि कोई तकनीकी दिक्कत है तो उनका सुझाव है कि हर मंत्री को एक सचिव दे दिया जाए।
एक सचिव के पास अलग-अलग विभाग होने से उन्हें इधर-उधर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक सचिव के पास सारे विभाग हो जाएं और वह एक मंत्री के पास हो तो इससे कार्यदक्षता में बढ़ेगी। कार्य में भी तेजी भी आएगी।
बता दें कि महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य के आईएएस अधिकारी वी. षणमुगम से विवाद के बाद सतपाल महाराज ने सचिवों की सीआर मंत्रियों द्वारा लिखे जाने की मांग उठाई थी।
इस मांग के बाद कैबिनेट मंत्री डॉ.हरक सिहं रावत और सुबोध उनियाल ने भी कहा था कि सचिवों वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट व सीआर उनके पास नहीं आती है। लेकिन मुख्यमंत्री का कहना था कि प्रदेश में आईएएस अफसरों की कमी के कारण एक-एक सचिव को कई-कई विभाग देने होते हैं। उनके पास मंत्रियों के अलग-अलग विभाग होने से मंत्रियों के सीआर लिखने में व्यावहारिक दिक्कते हैं। इसके बाद महाराज का यह बयान आया है कि तकनीकी दिक्कत है एक मंत्री को एक सचिव दे दिया जाए।
भगत ने कहा एक मंत्री को एक सचिव मुमकिन नहीं
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के बयान से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने असहमति जताई है। मीडियाकर्मियों के प्रश्न के जवाब में भगत ने कहा कि प्रदेश में आईएएस अफसरों की कमी है। इसलिए हर मंत्री को एक सचिव देना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि सचिवों की सीआर लिखने का अधिकार मंत्रियों के पास है। सीआर लिखने से उन्हें किसी ने रोका नहीं है।