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उत्तराखंड : भाजपा विधायकों में असंतोष की चर्चा से सियासी हलकों में मची हलचल

Wed, 02 Sep 2020 12:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 02 Sep 2020 12:50 PM IST
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uttarakhand news: Discussion of dissatisfaction among BJP MLAs caused stir in state politics
विधायक चुफाल - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

सोशल मीडिया पर भाजपा विधायकों में असंतोष और हल्द्वानी में उनकी बैठक की चर्चाओं को असंतुष्ट बताए जा रहे नेताओं ने खारिज कर दिया है। इन विधायकों ने डीडीहाट के विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल का नाम भी लिया जा रहा था। इस संबंध में चुफाल का कहना है कि विधायक उनसे मुलाकात के लिए आए थे। वह खुद दिल्ली रवाना हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि विधायक उनसे किस मुद्दे पर मुलाकात करने आए थे।

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सोशल मीडिया पर भाजपा विधायकों के असंतोष की खबर तारी होने पर विपक्षी दलों ने भी इसमें रुचि लेनी शुरू कर दी थी। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने तो सरकार से नया जनादेश हासिल करने तक को कह दिया है। यह चर्चा जोरों पर थी कि कुमाऊं-गढ़वाल के भाजपा के असंतुष्ट विधायक दो सितंबर को हल्द्वानी में बैठक करने जा रहे हैं।
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इसके लिए उनका जमावड़ा हल्द्वानी में लगने लगा है। इन विधायकों में चुफाल का नाम भी लिया जा रहा था। इस संबंध में पूछने पर चुफाल ने बताया कि हल्द्वानी में कुछ विधायक  उनसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि वह खुद मंगलवार दोपहर में दिल्ली रवाना हो गए थे।
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किच्छा से भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि उन्हें बैठक की जानकारी नहीं है और ना ही उन्हें बुलाया गया है। वह किसी बैठक में नहीं जा रहे हैं। शुक्ला ने यह जरूर स्वीकारा कि अफसरशाही को लेकर नाराजगी थी, जो दूर हो चुकी है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत ने भी विधायकों में असंतोष और उनकी किसी तरह की बैठक की बात से इनकार किया है।

विधानसभा सत्र में भी बरपेगा हंगामा

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने तो सरकार से नया जनादेश हासिल करने तक को कह दिया। नेता प्रतिपक्ष का यह रुख विधानसभा सत्र में विपक्ष के तेवर तल्ख रहने का संकेत भी दे रहा है। कोरोना के कारण अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि प्रदेश में विधानसभा सत्र का संचालन किस तरह से होगा।

इस काम में उलझे सत्ता पक्ष को फ्लोर मैनेजमेंट से भी अलग से जूझना पड़ेगा। सत्र 23 सितंबर से है और इससे पहले ही नेता प्रतिपक्ष ने नए जनादेश की मांग कर विपक्ष के रुख का संकेत भी दे दिया है।

कांग्रेस वैसे कोराना पर नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महेश नेगी प्रकरण आदि मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है। प्रीतम सिंह अब जीएसटी को लेकर भी केंद्र और भाजपा की सरकार पर हमलावर हैं। हरीश रावत बेरोजगारी के मुद्दे पर मुखर हैं। जाहिर है कि सत्र के दौरान कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने से लेकर अन्य तरीके से सियासत गरमा सकती है। 

चुनाव नजदीक आते ही उठता रहा है विधायकों के अंसतोष का मामला

प्रदेश में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार को भी विधायकों के असंतोष का सामना करना पड़ा था। उस समय भाजपा ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फर्क इतना है कि उस समय रावत से कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के मंत्री तक खासे नाराज थे।

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