{"_id":"61cc0a0a79411d0f16302229","slug":"uttarakhand-news-culture-of-old-tehri-is-still-alive-in-the-hearts-abhinav-thapar","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहरादून: दिलों में आज भी जिंदा है पुरानी टिहरी की संस्कृति - अभिनव थापर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देहरादून: दिलों में आज भी जिंदा है पुरानी टिहरी की संस्कृति - अभिनव थापर
Wed, 29 Dec 2021 12:54 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 29 Dec 2021 12:54 PM IST
सार
अभिनव थापर व सुबोध बहुगुणा ने स्थानीय लोगों के साथ टिहरी के लैंड स्कैप पर हुबहु बनाए गए घंटाघर, राजा का दरबार, आजाद मैदान, बस अड्डा, गंगा जी, भगीरथी नदी का का मार्ग, टिहरी बाजार की अनुकृति पर दीप प्रज्ज्वलित किए।
विज्ञापन
दीप प्रज्वलित किए
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुरानी टिहरी के स्थापना दिवस 28 दिसंबर के मौके पर बल्लूपुर, देहरादून में बने टिहरी की अनुकृति पर दीप प्रज्वलित कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां दीप जलाकर टिहरी के शहर को याद कर लोग भावुक हो गए। इस दौरान आने वाली पीढ़ियों को टिहरी और उसकी संस्कृति याद रहे इसके लिए कामना की।
विज्ञापन
मंगलवार को अभिनव थापर व सुबोध बहुगुणा ने स्थानीय लोगों के साथ टिहरी के लैंड स्कैप पर हुबहु बनाए गए घंटाघर, राजा का दरबार, आजाद मैदान, बस अड्डा, गंगा जी, भगीरथी नदी का का मार्ग, टिहरी बाजार की अनुकृति पर दीप प्रज्ज्वलित किए। उन्होंने कहा कि टिहरी ऐतिहासिक संस्कृति, परंपरा और सभ्यता से राजशाही के समय से गढ़वाल क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता था।
विज्ञापन
टिहरी आज भले ही झील के पानी में समा गया हो और तस्वीरों और इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गई हो, लेकिन उसी संस्कृति और पंरपरा को संजोए रखने के लिए हम टिहरी का स्थापना दिवस मना रहे हैं।
विज्ञापन
कहा कि पुरानी टिहरी का गौरवमय इतिहास रहा है और यहां के लोगों ने देश के विकास के लिए अपनी जन्मभूमि देकर बहुत बड़ा योगदान दिया। टिहरी शहर हमेशा हर एक उत्तराखंड की स्मृतियों में जिंदा रहेगा। इस मौके पर गौरव डोभाल, अविरल, सुकांत, शशांक आदि थे।