उत्तराखंड: 15 नवंबर से खुलेगा कॉर्बेट का ढिकाला जोन, पहले दिन 80 पर्यटक करेंगे नाइट स्टे
ढिकाला जोन में 15 नवंबर को 80 पर्यटक नाइट स्टे करेंगे, जो पहले ही बुकिंग करवा चुके हैं। वहीं, डे विजिट सफारी में 127 पर्यटक ढिकाला जोन में भ्रमण पर जा पाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का ढिकाला जोन 15 नवंबर से खुलने जा रहा है। इसके लिए विभाग ने तैयारियां पूरी कर लीं हैं। इधर, दिसंबर तक ढिकाला जोन में बुकिंग फुल हो चुकी है। जोन खुलने के बाद पर्यटक रात्रि विश्राम और दिन की सफारी कर सकेंगे।
15 नवंबर को 80 पर्यटक करेंगे नाइट स्टे
पर्यटकों की सुविधा के लिए कॉर्बेट प्रशासन ने सड़कों की मरम्मत और ढिकाला जोन में गेस्ट हाउसों की सफाई करा दी गई है। ढिकाला जोन में 15 नवंबर को 80 पर्यटक नाइट स्टे करेंगे, जो पहले ही बुकिंग करवा चुके हैं। वहीं, डे विजिट सफारी में 127 पर्यटक ढिकाला जोन में भ्रमण पर जा पाएंगे।
उत्तराखंड: 15 नवंबर से खोला जाएगा राजाजी टाइगर रिजर्व, एनटीसीए ने दी हरी झंडी
ढिकाला जोन में पर्यटकों को डे विजिट के लिए चार वाहन सुबह और चार वाहन शाम को सफारी पर लेकर जाते हैं। एक वाहन में 15 से 17 पर्यटक होते हैं। दूसरी ओर, ढिकाला जोन में 28 कमरे हैं, जिनमें पहले दिन 80 पर्यटक रुकेंगे। नाइट स्टे भी 15 नवंबर के लिए फुल है। पार्क वार्डन आरके तिवारी ने बताया कि 19 नवंबर को 3 विदेशी पर्यटक कॉर्बेट पार्क के ढिकाला जोन में भ्रमण पर जाएंगे।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व मामले की जांच अब विजिलेंस को
कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग में अवैध निर्माण और पेड़ों के पातन मामले की जांच अब विजिलेंस करेगी। शुक्रवार को शासन ने इस आशय के आदेश कर दिए हैं। अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री आनंद वर्द्धन ने इसकी पुष्टि की है।
बता दें कि कालागढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन पाखरो में टाइगर सफारी के लिए स्वीकृति से ज्यादा पेड़ काटे जाने और पाखरो से कालागढ़ तक अवैध निर्माण का मामला इन दिनों सुर्खियों छाया हुआ है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने अपनी स्थलीय जांच रिपोर्ट में इन शिकायतों को सही पाते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की है। यह प्रकरण दिल्ली हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। जबकि नैनीताल हाईकोर्ट ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
इस मामले में मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी और अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) बीके गांगटे पहले ही जांच से इनकार कर चुके हैं। शासन के निर्देश पर पीसीसीएफ ने चतुर्वेदी को और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने गांगटे को जांच सौंपी थी। लेकिन दोनों ने ही अधिकारियों ने अलग-अलग कारण बताते हुए जांच करने से इनकार कर दिया। अब शासन ने इस मामले में विजिलेंस जांच कराने का निर्णय लिया है।