उत्तराखंड: कांग्रेस की सरकार आते ही भंग होगा देवस्थानम बोर्ड- गणेश गोदियाल
गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार ने तमाम ऐसे काम किए हैं, जिन वर्गों के लिए वह योजनाएं लेकर आई, वो ही उसका विरोध कर रहे हैं।
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उत्तराखंड में नव नियुक्त कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए सत्ता में आने पर चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग करने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक्ट हक हकूकधारियों के अधिकारों का हनन करता है।
बुधवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार ने तमाम ऐसे काम किए हैं, जिन वर्गों के लिए वह योजनाएं लेकर आई, वो ही उसका विरोध कर रहे हैं। देवस्थानम बोर्ड भी इनमें से एक है। चारधाम से जुड़े तीर्थ पुरोहित लगातार इस बोर्ड का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से सुनवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा जब वे मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तब समिति की कमाई 40 करोड़ रुपये सालाना थी। यदि सही प्रबंधन हो तो समिति के रहते ही कमाई भी बढ़ाई जा सकती है और चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं को उचित सुविधाएं भी मुहैया कराई जा सकती हैं। पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि पहले तो हम सरकार से अनुरोध करेंगे कि वह इस एक्ट को वापस ले, नहीं तो सत्ता मेें आने पर कांग्रेस इस काम को खुद अंजाम देगी।
केदारनाथ में तेज बारिश के बीच तीर्थपुरोहितों का प्रदर्शन
देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों ने आंदोलन तेज कर दिया है। तेज बारिश में मंदिर में नारेबाजी करते हुए उन्होंने सरकार के खिलाफ धरना दिया। उन्होंने बोर्ड भंग करने की मांग करते हुए पुनर्निर्माण के नाम पर केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों के भवन/धर्मशालाओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।
बुधवार को तेज बारिश व घने कोहरे के बीच केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों ने मंदिर परिसर में धरना दिया। कहा कि देवस्थानम बोर्ड उन्हें किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं है। यदि शासन-प्रशासन द्वारा इसे जबरन थोपा गया, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। कहा कि बीते एक वर्ष से अधिक समय से चारधाम में देवस्थानम बोर्ड का विरोध किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार ध्यान नहीं दे रही है। एक तरफ कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं।
दूसरी तरफ बोर्ड का विस्तार कर सरकार धामों पर कब्जे की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी हठधर्मिता से बोर्ड का गठन कर उत्तराखंड चारधाम की प्राचीन व्यवस्था को भंग किया है, जो माफी लायक नहीं है। उन्होंने केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए तीर्थपुरोहितों के भवन/धर्मशालाओं की नापजोख पर भी रोष जताया। कहा कि उन्हें बिना विश्वास में लिए बगैर केदारपुरी के भवनों की नापजोख करना उचित नहीं है। इस मौके पर तीर्थपुरोहित तेज प्रकाश, आचार्य संतोष त्रिवेदी, आचार्य संजय तिवारी, रमाकांत शर्मा, शशि अवस्थी, नवीन शुक्ला, रोशन त्रिवेदी, चमन लाल शुक्ला आदि मौजूद थे।