उत्तराखंड: कांग्रेसियों का सचिवालय कूच, आपदा प्रभावितों की अनदेखी का आरोप, सचिवालय से पहले पुलिस ने रोके
विगत 17, 18 एवं 19 अक्तूबर को राज्य के विभिन्न स्थानों पर भीषण दैवीय आपदा आने के कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। जानमाल का भारी नुकसान हुआ था।
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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को प्रदेश के आपदा प्रभावितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस भवन से सचिवालय कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सचिवालय से पहले ही रोक लिया। इस पर कार्यकर्ता वहीं धरने एवं उपवास पर बैठ गए। जहां हुई सभा में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार ने आपदा के कई दिन बाद भी प्रभावितों की सहायता के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के मन में दहशत
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के मन में दहशत का माहौल है, लेकिन भाजपा सरकार को जनता के दुख दर्द से कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ितों एवं प्रभावितों से मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया। कांग्रेस ने इसके बाद सरकार से मांग की गई थी कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों को शीघ्र सहायता के प्रयास किए जाएं, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा में लोगों की जान माल का भारी नुकसान हुआ है।
इसके बावजूद राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग समुचित कदम उठाने एवं संवेदनशील क्षेत्र के लोगों के विस्थापन की व्यवस्था करने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। आपदा में 80 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिनमें अन्य राज्यों के पर्यटक भी शामिल हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि आपदा क्षति के आंकड़ों में भी विरोधाभास है।
उत्तराखंड आपदा: प्रदेश में 77 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा, 900 करोड़ का हुआ नुकसान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आपदा के दूसरे दिन देश के गृहमंत्री अमित शाह उत्तराखंड दौरे पर आए। उनसे राज्य वासियों को उम्मीद थी कि शायद गृहमंत्री आपदा के पीड़ितों एवं प्रभावितों के घावों पर मरहम लगाने का काम करेंगे, लेकिन उनका यह दौरा मात्र पर्यटन सैरसपाटा साबित हुआ। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से उत्तराखंड को10 हजार करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है।
सचिवालय कूच करने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल, जिलाध्यक्ष गौरव चौधरी, उपाध्यक्ष संगठन पृथ्वीपाल चौहान, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, महामंत्री संगठन मथुरादत्त जोशी, गोदावरी थापली, राजपाल खरोला, सतपाल ब्रहमचारी, राकेश नेगी, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय किशोर, उमेश बोरा, कोमल बोरा, अकील अहमद, मीना रावत, विनोद चौहान, शांति रावत, गोपाल राणा, प्रदीप जोशी, सुरेंद्र रांगड, पूरन रावत, राजेश चमोली, कमलेश रमन, अनिल रावत, नीनू सहगल, मंजू त्रिपाठी आदि शामिल रहे।
हरीश ने कार्यकर्ताओं को बताए उनके दो कर्तव्य
धरना एवं उपवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनके दो कर्तव्य बताए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता इसे हमेशा याद रखें। एक तो सरकार को झकझोर दें और दूसरा दुखी लोगों के साथ खड़े हों। तभी लोग आपको स्वीकारेंगे। हरीश रावत ने कहा कि कार्यकर्ता राज्य स्थापना दिवस पर पदयात्रा निकालेंगे। इसके अलावा विभिन्न तिथियों को अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
900 करोड़ रुपये के नुकसान का प्राथमिक आकलन
आपदा में मरने वाले लोगों का आंकड़ा 77 पहुंच गया है। विभागों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर 900 करोड़ रुपये के नुकसान का प्राथमिक आकलन किया गया है। 232 से अधिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। क्षति का आंकड़ा और भी बढ़ने के आसार हैं।
नैनीताल में सर्वाधिक 35 लोगों की मौत
आपदाग्रस्त जिलों में नैनीताल में सर्वाधिक 35 लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच घायल हैं। अल्मोड़ा में छह मौत, दो घायल, चंपावत में 11 मौत, चार घायल, बागेश्वर में चार मौत, यूएस नगर में दो मौत, तीन घायल, पौड़ी में तीन मौत, दो घायल, पिथौरागढ़ में तीन मौत, दो घायल, चमोली में एक मौत, चार घायल और उत्तरकाशी में दस लोगों की मौत, जबकि दो लोग घायल हुए हैं।
चार सौ से अधिक सरकारी स्कूलों को नुकसान
उत्तराखंड में भारी बारिश चार सौ से अधिक सरकारी स्कूलों को भी नुकसान पहुंचने का अनुमान है। नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर में सबसे अधिक स्कूल भवनों को नुकसान पहुंचा है। प्रदेश में आपदा से खेती किसानों को लगभग 97 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।