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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : देहरादून कैंट बोर्ड से बाहर हो सकते हैं सिविल एरिया
Wed, 16 Dec 2020 10:24 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 16 Dec 2020 10:24 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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कैंट बोर्डों के सिविल क्षेत्रों को नगर पालिका या नगर निगम में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए रक्षा संपदा विभाग ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा, नैनीताल और रानीखेत तीन कैंट बोर्ड से सुझाव मांगे हैं। कैंट बोर्ड फिलहाल इस पर लोगों की राय ले रहे हैं।
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कैंट बोर्डों में हमेशा बजट की कमी रहती है। जिसके कारण छावनी परिषद के सिविल क्षेत्रों में हमेशा सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशानी रहती है। साथ ही इन क्षेत्रों में भवन निर्माण सहित कई प्रतिबंध हैं। यहां तक कि कई क्षेत्रों में सेना की ओर से रास्ते बंद करने से लोगों को परेशानी होती है।
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इन परेशानियों को देखते हुए देशभर में कई कैंट क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर सिविल क्षेत्रों को नगर निगम या नगर पालिका में शामिल करने की मांग की थी। इस संदर्भ में रक्षा मंत्रालय ने लखनऊ और मऊ समेत देश के पांच कैंट बोर्डों से सुझाव मांगें हैं। इनमें उत्तराखंड के तीन कैंट बोर्ड शामिल हैं।
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दून से भी मांगे जा सकते हैं सुझाव
दून के गढ़ी, क्लेमेनटाउन और चकराता कैंट बोर्ड में भी इस प्रकार की कई दिक्कतें हैं। क्लेमेनटाउन और गढ़ी में कई बार सेना की ओर से रास्ते बंद करने से लोगों को भारी परेशानी होती है। भवन निर्माण को लेकर भी कई प्रतिबंध हैं। सूत्रों की मानें तो जल्द ही दून के कैंट बोर्डों से भी सुझाव मांगे जा सकते हैं। कैंट बोर्ड क्लेमेनटाउन सीईओ अभिषेक राठौर और सीईओ गढ़ी तनु जैन ने बताया कि फिलहाल रक्षा मंत्रालय से ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है।
नैनीताल, अल्मोडा में चल रहा सर्वे
नैनीताल के कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष बहादुर सिंह रौतेला ने बताया कि फिलहाल कैंट क्षेत्र के लोगों से राय मांगी जा रही है और सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में जो भी सामने आएगा, उसके हिसाब से रक्षा मंत्रालय को जबाब दिया जाएगा। वहीं अल्मोड़ा के कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा ने कहा कि उनके क्षेत्र के लोगों ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का सुझाव दिया है।