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उत्तराखंडः कैबिनेट के फैसलों में लोक लुभावन बजट का संकेत, अर्थव्यवस्था को गति देने की ओर इशारा

Thu, 18 Feb 2021 10:59 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 18 Feb 2021 10:59 AM IST
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Uttarakhand news : cabinet meeting decision Signs of public interest budget
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

कोरोना के कारण कराह रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संभालने और चुनावी वर्ष के लोक लुभावन बजट का इंतजाम बुधवार को प्रदेश सरकार ने किया। बजट मेें इजाफा करीब दस प्रतिशत का ही है लेकिन सरकार ने योजना का आकार करीब 18 प्रतिशत बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। 

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बुधवार को कैबिनेट ने एक मार्च से शुरू हो रहे सत्र में करीब 57 हजार करोड़ रुपये का बजट रखने की संस्तुति की। सूत्रों ने बताया कि योजना का आकार करीब 13 हजार करोड़ रुपये का रहेगा। पिछली बार सरकार करीब 53 हजार करोड़ रुपये का बजट लेकर आई थी। योजना खर्च करीब 11 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान था। इस हिसाब से सरकार ने कुल बजट में दस प्रतिशत का ही इजाफा किया है।
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प्रदेश में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों आदि गैरयोजना मदों में अधिक खर्च होता है। यह योजना आकार का करीब चार गुना होता है। इससे पहले भी सरकार बजट में करीब दस प्रतिशत का इजाफा करती आई है लेकिन योजना के आकार में भी इतना ही इजाफा होता रहा है। इस बार योजना के आकार में करीब 18 प्रतिशत का इजाफा कर सरकार ने लोक लुभावन बजट की भूमिका भी तैयार कर ली है। 

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बजट का आकार बढ़ाने का हौसला प्रदेश सरकार को 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से भी मिला है। 28 हजार करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान इस बार सरकार को मिला है। आपदा प्रबंधन में भी सरकार को खासी धनराशि मिली है। इसके साथ ही जीएसटी की माह की सौ करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति मिलना भी एक कारण है।

कोरोना काल में लगा था झटका, केंद्रीय अनुदान का मिला सहारा

लॉक डाउन के कारण प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर शून्य से भी कम हो गई थी। जीएसटी से आय भी निम्नतम स्तर पर रही। इतना होने पर भी केंद्रीय अनुदान की बढ़ी हुई राशि ने सरकार के बजट को संभाले रखा।

राजकोषीय घाटे को संभालने की है चुनौती, खास मुश्किल भी नहीं

कोरोना काल में राजकोषीय घाटे को भी सरकार संभालने में सफल रही थी। सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी के 3.5 प्रतिशत से यह अधिक नहीं हुआ। इस बार के बजट से भी जाहिर है कि सरकार को इस मोर्चे पर अधिक चिंता नहीं करनी होगी। वर्ष 2020-21 केे बजट में सरकार ने करीब 7500 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था। सत्र में एफआरबीएम के तहत घोषित होने वाले अनुमान से तस्वीर पूरी तरह से साफ होगी।

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