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उत्तराखंड: 2035 तक प्रदेश में 869 करोड़ यूनिट बढ़ेगी बिजली की मांग, उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना पर काम
Tue, 12 May 2026 08:02 AM IST
Renu Saklani
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Tue, 12 May 2026 08:02 AM IST
सार
साल 2035-36 तक उत्तराखंड की पीक बिजली मांग 4100 मेगावाट के स्तर को पार कर सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड की पीक बिजली मांग 2883 मेगावाट रहने का अनुमान है, जो 2030-31 तक बढ़कर 3332 मेगावाट और 2035-36 तक 4113 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तराखंड में अगले 10 साल में बिजली की मांग 869 करोड़ यूनिट तक बढ़ जाएगी। इस मांग की पूर्ति करने के लिए राज्य में उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की तर्ज पर अब उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग लॉन्ग-टर्म नेशनल रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान (2026-27 से 2035-36) तैयार करने में जुटा है।
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सीईए की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035-36 तक राज्य की पीक बिजली मांग 4100 मेगावाट के स्तर को पार कर सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड की पीक बिजली मांग 2883 मेगावाट रहने का अनुमान है, जो 2030-31 तक बढ़कर 3332 मेगावाट और 2035-36 तक 4113 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। राज्य की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता 2026-27 में 1,755.7 करोड़ यूनिट से बढ़कर 2035-36 तक 2,635.2 करोड़ यूनिट होने की उम्मीद है।
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रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मांग केवल दिन में ही नहीं बल्कि रात के समय (नॉन-सोलर घंटों) में भी चुनौतीपूर्ण होगी। साल 2026-27 के लिए अनुमान है कि सोलर घंटों के दौरान उत्तराखंड की कोइन्सिडेंट पीक मांग 2651 मेगावाट होगी जबकि नॉन-सोलर घंटों (रात-शाम) में यह बढ़कर 2763 मेगावाट हो जाएगी।यह अंतर दर्शाता है कि राज्य को रात के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की योजना बनानी होगी। नियामक आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि राज्य के रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान पर काम शुरू किया जा चुका है।