उत्तराखंड : वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में बुकिंग की होगी एकल खिड़की प्रणाली, समीक्षा बैठक में हुए कई अहम फैसले
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प्रदेश के वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार बुकिंग का एकल खिड़की प्रणाली स्थापित करेगी। इसके लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन तैयार होगा, जिसकी मदद से लोग घर बैठे बुकिंग करा सकेंगे। यह निर्णय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई वन विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में तय हुआ कि वन विभाग से लकड़ी और आरबीएम की अनुमति समय पर दी जाएगी और इस सेवा को सेवा का अधिकार में शामिल किया जाएगा।
रवन्नों की चैक पोस्ट पर नियमित चैकिंग होगी और चैक पोस्टों पर कैमरे लगेंगे, यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोपे गए पौधों की सुरक्षा के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित न हो, बल्कि इनकी सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदारी तय की जाए।
पौधरोपण एवं उनकी सुरक्षा के लिए जन सहयोग लिया जाए। राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाए। औषधीय आधारित ग्रोथ सेंटर विकसित करने के लिए योजना बनाई जाए। वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य करने वाले श्रमिकों का भुगतान समय पर हो। वनाग्नि को रोकने के लिए समुचित प्रयासों की जरूरत है।
दो साल में 15 ग्रोथ सेंटर बनेंगे
वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने बताया कि 2020-21 में पांच और 2021-22 में 10 ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जाएंगे। जायका के तहत स्थापित होने वाले इन ग्रोथ सेंटरों में क्लस्टर फेडरेशन एवं स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास एवं पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बाघों-हाथियों की आबादी में बढ़ोतरी
कैबिनेट मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने बताया कि राज्य में बाघों व हाथियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 2006 में बाघों की संख्या 178 थी, जो 2018 तक बढ़कर 442 हो गई। हाथियों की संख्या 2017 तक 1839 थी, जो अब बढ़कर 2026 हो गई है।
तीन साल में 1.20 लाख को दिया रोजगार
वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग ने तीन साल में 1.20 लाख लोगों को रोजगार दिया। उन्होंने बताया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व में ढेला ‘रेस्क्यू सेन्टर’ एवं पाखरो ‘टाइगर सफारी’ की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। गर्जिया टूरिज्म जोन की स्थापना की जा रही है। धनगढ़ी म्यूजियम का उच्चीकरण किया जा रहा है।
पिछले तीन सालों में प्रतिवर्ष औसतन 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया गया। प्रदेश में 14.77 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना है। वर्षा जल संरक्षण की दिशा में दो वर्षों में लगभग 68.37 करोड़ लीटर वर्षा जलसंचय की संरचनाओं का निर्माण किया गया। इस वर्ष 41.00 करोड़ लीटर जल संचय का लक्ष्य रखा गया है। 68 जल धाराओं का पुनरोद्धार का कार्य प्रगति पर है।