उत्तराखंड: चीन सीमा के नजदीक चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर उतरा वायुसेना का एएन-32 विमान
भारत-चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जनपद में चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सेना के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इसे वायु सेना के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
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उत्तराखंड से लगी चीन सीमा के नजदीक चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर सोमवार को वायुसेना का एएन-32 विमान उतारा और फिर उड़ान भरी। इस दौरान विमान से वायुसेना के अधिकारी और सेना के 28 जवान उतरे और फिर तुरंत वापस विमान में बैठ गए। यह जवानों का विशेष अभ्यास था। यह अभ्यास अगले एक पखवाड़े तक जारी रहने की संभावना है।
भारत-चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जनपद में चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सेना के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इसे वायु सेना के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में विकसित करने की तैयारी है। चीन सीमा के निकट होने के कारण सेना यहां आए-दिन इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए अभ्यास करती रहती है।
सोमवार सुबह वायुसेना की हेलीकाप्टर कम्यूनिकेशन टीम बरेली से पहुंची। इस टीम के पहुंचने के कुछ देर बाद वायुसेना का मल्टीपरपज एएन-32 विमान वायुसेना के अधिकारियों व सेना के जवानों को लेकर पहुंचा।
हथियारों से लैस जवान विमान से उतरे और हवाई पट्टी से लगे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद तुरंत विमान में सवार हो गए। इसके बाद यह विमान लौट गया। वायु सेना का एनएन-32 विमान पहले भी कई बार लैंडिंग और टेकऑफ कर चुका है।
सूत्रों की मानें तो वायुसेना चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर हरक्यूलिस और छोटे फाइटर प्लेन को उतारने का मन बना रही है। रूटीन अभ्यास के दौरान वायुसेना यहां चिनूक, डोनियर, एमआई 17 हेलीकाप्टर की सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेकऑफ करा चुकी है।
15 जुलाई को अग्रिम चौकियों का जायजा लेने पहुंचा था चिनूक
भारत-चीन सीमा से लगी अग्रिम चौकियों का जायजा लेने के लिए 15 जुलाई को वायुसेना का चिनूक हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी पहुंचा था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ हवाईअड्डे पर पहली बार वायुसेना का चिनूक हेलीकॉप्टर उतरा था।
बता दें कि भारत-चीन के बीच उत्तराखंड में 345 किमी लंबी सीमा है। जनपद से चीन की करीब 117 किमी सीमा लगती है। यहां सीमाओं की सुरक्षा के लिए अग्रिम चौकियों पर भारतीय सेना के जवानों के साथ ही आईटीबीपी के हिमवीर पूरी मुस्तैदी के साथ निगरानी कर रहे हैं।