उत्तराखंड: स्वास्थ्य विभाग को मिले 403 नए डॉक्टर, आरक्षित श्रेणी के पदों पर नहीं मिल रहे अभ्यर्थी
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उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने स्वास्थ्य विभाग में 763 पदों के सापेक्ष 403 डॉक्टरों की चयन सूची जारी कर दी है। इससे स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के खाली पदों की समस्या दूर होगी। आरक्षित श्रेणी के पदों पर बोर्ड को अभ्यर्थी नहीं मिले हैं। जिससे 359 पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। एक मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से एक पद चयन प्रक्रिया में स्थगित रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से उत्तराखंड प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 763 पदों पर भर्ती करने का प्रस्ताव चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा गया है। इस पर बोर्ड ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। उक्त पदों के लिए बोर्ड के पास लगभग 1400 आवेदन आए। जिसमें दस्तावेज पूरे न होने पर 100 आवेदनों को निरस्त किया गया। 1300 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में भाग लिया। कोर्स और साक्षात्कार नंबरों के आधार पर वरीयता सूची तैयार करने के बाद बोर्ड ने रविवार को 403 पदों का परिणाम घोषित कर दिया है।
बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. डीएस रावत ने बताया कि चयनित 403 डॉक्टरों में लगभग 60 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। बोर्ड की ओर से चयनित डॉक्टरों की सूची स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। आरक्षित श्रेणी और दिव्यांग श्रेणी के पदों पर अभ्यर्थी न मिलने से 359 पदों पर चयन नहीं हुआ है। अभ्यर्थी न मिलने से आरक्षित श्रेणी के खाली पदों का बैकलॉग बढ़ रहा है।
श्रेणी पदों की संख्या चयनित
अनुसूचित 237 29
अनुसूचित जन जाति 25 06
अन्य पिछड़ा वर्ग 143 39
आर्थिक रूप कमजोर वर्ग 107 06
अनारक्षित वर्ग 251 323 (इसमें 97 ईडब्लूएस श्रेणी के हैं)
कुल - 763 403
स्टाफ नर्स के लिए 25 मार्च तक प्रमाणपत्र जमा कराने का मौका
चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्टाफ नर्स के 2621 पदों के लिए जिन अभ्यर्थियों ने जरूरी प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किए हैं, ऐसे अभ्यर्थियों को इसके लिए उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से 25 मार्च तक का अवसर दिया गया है।
परिषद के संयुक्त सचिव मुकेश पांडे के मुताबिक चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्टाफ नर्स के 2621 पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इसके लिए अंतिम तिथि चार मार्च तय की गई थी। अंतिम तिथि तक ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच करने पर पाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों के साथ जरूरी प्रमाणपत्र नहीं हैं।
संयुक्त सचिव के मुताबिक कुछ अभ्यर्थियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किए तो कुछ ने मूल निवास प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किए। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को इस बारे में जानकारी दी गई, इसके बावजूद कुछ अभ्यर्थियों ने प्रमाणपत्र अपलोड किए गए। जबकि अन्य अभ्यर्थियों की ओर से इसे भी तक अपलोड नहीं किया गया है।
संयुक्त सचिव ने कहा कि अस्वीकृत किए गए आवेदनकर्ताओं को प्रमाणपत्र जमा कराने के लिए 25 मार्च तक समय दिया गया है। इसके बाद इनके प्रमाणपत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। जिनके आवेदन को अंतिम रूप से अस्वीकृत कर दिया जाएगा।