उत्तराखंड: कैबिनेट के फैसले से 4000 गेस्ट टीचरों को सौगात, नियमित शिक्षकों को झटका
कैबिनेट के फैसले से तबादले और प्रमोशन का इंतजार कर रहे नियमित शिक्षकों को झटका लगा है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट की पहली बैठक में प्रदेश के गेस्ट टीचरों का मानदेय बढ़ाने एवं उनके पदों को खाली न माने जाने का फैसला जहां 4000 से अधिक गेस्ट टीचरों के लिए बड़ी सौगात एवं उन्हें राहत देने वाला है। वहीं, इस फैसले से तबादले और प्रमोशन का इंतजार कर रहे नियमित शिक्षकों को झटका लगा है। नियमित शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से उनके तबादले व प्रमोशन प्रभावित होंगे।
धामी कैबिनेट ने लंबे समय से मानदेय बढ़ाए जाने की मांग कर रहे गेस्ट टीचरों का मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि गेस्ट टीचरों का मानदेय 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया जाएगा।
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प्राथमिकता के आधार पर उनकी गृह जिलों में तैनाती की जाएगी। जबकि उनके पदों को खाली नहीं माना जाएगा। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में चार हजार से अधिक गेस्ट टीचरों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन गेस्ट टीचरों के पदों को खाली न माने जाने के कैबिनेट के इस फैसले से नियमित शिक्षक नाराज हो गए हैं। नियमित शिक्षकों का कहना है कि सरकार का यह फैसला उस समय आया है। जब सहायक अध्यापक से लेक्चरर के 1800 पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया चल रही है।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी के मुताबिक गेस्ट टीचरों की भर्ती प्रक्रिया में लिखा है कि नियमित शिक्षकों के प्रमोशन और तबादले होने पर गेस्ट टीचरों के पदों को खाली माना जाएगा।
पूर्व में हाईकोर्ट से भी इन पदों को खाली दिखाने का आदेश हो चुका है। अब जबकि नियमित शिक्षक पिछले चार सालों से सरकार से रुके तबादलों की प्रक्रिया के शुरू होने एवं प्रमोशन की उम्मीद लगाए हैं। ऐसे में गेस्ट टीचरों के पदों को खाली न माना जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट से एक फैसला आया
शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माजिला ने कहा कि गेस्ट टीचरों के मामले में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट से एक फैसला आया है। जिसमें इनके पदों को खाली माना गया है। राजकीय शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री डॉ. हेमंत पैन्युली ने कहा कि गेस्ट टीचरों के पदों को खाली न माने जाने के फैसले का संगठन विरोध करता है।
उधर गेस्ट टीचरों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने पहाड़ के युवाओं और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के हित में फैसला लिया है। इस फैसले से नियमित शिक्षकों के तबादले और प्रमोशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
गेस्ट टीचरों के पदों को खाली न माने जाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। संगठन गेस्ट टीचरों का मानदेय बढ़ाने एवं उनकी गृह जिलों में तैनाती के फैसले का स्वागत करता है, लेकिन उनके पदों को खाली न माने जाने से नियमित शिक्षकों के तबादले एवं प्रमोशन के रास्ते बंद होंगे।
- केके डिमरी, प्रदेश अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ
सरकार के गेस्ट टीचरों के मामले में लिए गए फैसले का विरोध अनावश्यक है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहली कैबिनेट ने पहाड़ के युवाओं के हित में यह फैसला लिया है। नियमित शिक्षकों के तबादले एवं प्रमोशन के लिए कई स्कूलों में पद खाली हैं।
- दौलत जगुड़ी, प्रांतीय महामंत्री माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ