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उत्तराखंड: पहले चरण में खाने योग्य मशरूम की 23 प्रजातियां चिह्नित, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत हो रहा अध्ययन
Fri, 06 Aug 2021 03:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 06 Aug 2021 03:42 PM IST
सार
योजना के पहले चरण में नागालैंड विश्वविद्यालय के साथ ही उत्तराखंड में गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की मदद से मशरूम की प्रजातियों को चिह्नित किया जा रहा है।
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मशरूम(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर समेत देश के तमाम हिमालयी राज्यों में जंगलों में पाई जाने वाली मशरूम की प्रजातियों को चिह्नित करने की कवायद शुरू की गई है। उत्तराखंड और हिमाचल में 23 से अधिक मशरूम की प्रजातियों को चिह्नित किया गया है। यह मशरूम खाने योग्य हैं।
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योजना के पहले चरण में नागालैंड विश्वविद्यालय के साथ ही उत्तराखंड में गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की मदद से मशरूम की प्रजातियों को चिह्नित किया जा रहा है। राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार गढ़वाल विवि के विशेषज्ञों की ओर से आईईआरपी लघु अनुदान परियोजना के तहत पिछले तीन साल के भीतर मध्य और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बटन, अगरकस, गैनोडर्मा, ग्रीफोला, मोर्चेल्ला, प्लुरोट्स, यारसा, अमानिता समेत कई प्रजातियों को चिह्नित किया गया है।
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अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हिमालयी राज्यों में मशरूम बड़ी मात्रा में होते हैं, लेकिन इनकी सही जानकारी नहीं होने व्यावसायिक तौर पर इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। शोध में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चीड़, बुरांश देवदार के जंगलों में जैव विविधता अधिक होने से मशरूम की कई प्रजातियां होती हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. आरपी भट्ट की अगुवाई में मशरूम की 23 से अधिक प्रजातियों को चिह्नित किया गया है। फिलहाल शोधार्थी टीम मशरूम की 10 प्रजातियों में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन की मात्रा का अध्ययन कर रही है।
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दुनिया में पाई जाती हैं 10 हजार प्रजातियां
भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में मशरूम की 10,000 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 70 प्रजातियां ऐसी हैं, जिनका बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा उत्पादन किया जाता है। बाकी प्रजातियां प्राकृतिक तौर पर निकलती हैं। इनमें बटन मशरूम, सीप मशरूम और पैड़ी स्ट्रॉ मशरूम चर्चित प्रजातियां हैं।
तीन लाख प्रति किलोग्राम बिकता है व्हाइट ट्रफल मशरूम
व्हाइट ट्रफल मशरूम दुनिया की ऐसी प्रजाति है जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक महंगी कीमत पर बिकता है। रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट ट्रफल मशरूम तीन हजार प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है। व्हाइट ट्रफल मशरूम का उत्पादन इटली में सबसे अधिक होता है।
कैंसर समेत कई बीमारियों में कारगर
कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों को दूर करने में कारगर है। मशरूम नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि मशरूम एंटी कैंसर और एंटी डायबिटीज होने के साथ ही एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल्स भी है। खानपान में मशरूम का इस्तेमाल करने से जानलेवा कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से खुद को बचाया जा सकता है साथ ही यदि इन बीमारियों से पीड़ित ने तो मशरूम का सेवन करने से बीमारियों से बचाव होता है।
राष्ट्रीय हिमालयी मिशन के तहत उत्तराखंड, हिमाचल समेत तमाम हिमालयी राज्यों में मशरूम की प्रजातियों को चिह्नित किया जा रहा है। फिलहाल पहले चरण में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 23 ऐसी प्रजातियों को चिह्नित कर लिया गया है। प्रजातियों को चिह्नित करने के साथ ही उनके बारे में स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे उनका अधिक से अधिक उपयोग कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकें।
-गिरीश कुमार, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन