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मंत्रिमंडल में जगह न पाकर उत्तराखंड ने बनाया रिकॉर्ड

Mon, 10 Nov 2014 03:48 PM IST
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Mon, 10 Nov 2014 03:48 PM IST
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No Seat for Uttarakhand in Modi Cabinet

केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कोई स्थान न पाकर उत्तराखंड ने एक रिकॉर्ड बना दिया है।

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देश भर में अब उत्तराखंड के अलावा कोई ऐसा प्रदेश नहीं बचा है जहां से भाजपा को कोई सीट मिली हो और वहां से किसी न किसी को मंत्रीपद न मिला हो।

मंत्रीपद पाने वालों में वे राज्य भी शामिल हैं जहां से भाजपा को मात्र एक ही सीट मिली है, जबकि उत्तराखंड में भाजपा ने कांग्रेस से चार सीटें छीनकर पांचों पर जीत दर्ज की थी।

विस्तारीकरण में विसंगतियां किस कदर हावी हैं इसके कुछ रोचक उदाहरण हैं मसलन, तमिलनाडु में 48 में से मात्र एक कन्याकुमारी की सीट भाजपा को मिली और विजेता एमपी राधाकृष्णन को मंत्री पद दे दिया गया।
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उधर हरियाणा में जीवनभर भाजपा में रहे नेता दरकिनार कर चुनाव से मात्र एक माह पूर्व कांग्रेस से आए वीरेंद्र चौधरी और इंद्रजीत राव को मंत्रीपद मिल गया।

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कम से कम सीट की थी आस

No Seat for Uttarakhand in Modi Cabinet

दूसरी ओर पहली बार सांसद बनने वाले भी मंत्री बनाए गए हैं इनमें राज्यवर्धन राठौर, साधवी निरंजन ज्योति, विजय सापला, महेश शर्मा, सांवरलाल जाट, गिरराज सिंह, यशवंत सिन्हा के पुत्र जयंत सिन्हा शामिल हैं।

जबकि उत्तराखंड के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्रियों रमेश पोखरियाल निशंक, बीसी खंडूड़ी व भगत सिंह कोश्यारी को कम से कम सीट की आस तो थी। पंजाब से गठबंधन के बावजूद मात्र दो सीटें मिली, फिर भी विजय सांपला को मंत्री बनाया गया।

आंध्र में 24 में से मात्र 4 सीट भाजपा को मिलीं और वैंकैया नायडू को मंत्री पद दे दिया गया। बंगाल में 42 में से मात्र 2 सीटें भाजपा को मिलीं, दार्जिलिंग व आसनसोल।

यहां से आसनसोल के सांसद बाबुल सुप्रियो को मंत्री बनाया गया है। उड़ीसा में 21 में से एकमात्र सीट सुंदरगढ़ से विजयी रहे जूएल राव को भी मंत्री बनाया गया है।

अरुणाचल से एक सीट जीतकर किरन रेजेजू और असम में 14 में से लगभग आधी 8 सीट जीतने वाली पार्टी ने सर्वकुमार सोनाल को मंत्री बनाया।

उत्तराखंड को जानबूझ कर दिया गया दंड

No Seat for Uttarakhand in Modi Cabinet

इसके अलावा चुनाव में हारने वाले अरुण जेटली और स्मृति ईरानी तो मंत्री बने ही, मात्र दो सीट वाले गोवा से पहले से ही श्रीपद नाईक मंत्री थे अब मुख्यमंत्री से इस्तीफा दिलाकर मनोहर पारिकर को भी मंत्री बना दिया गया।

बहरहाल उत्तराखंड के अलावा देश का कोई भी प्रदेश जहां से भाजपा का एक भी प्रतिनिधि संसद में है, मंत्री पद से वंचित नहीं रखा गया है।

उत्तराखंड में कहीं न कहीं भाजपाइयों में भारी गुटबाजी, मोदी लहर में जीतने के बाद राज्य में भाजपा का निष्क्रिय हो जाना और तीन विधानसभा चुनावों सहित पंचायत चुनावों में शर्मनाक हार, 28 सीटों के बावजूद प्रभावी विपक्ष की भूमिका न निभा पाना और लोकसभा चुनाव में जीत के बावजूद गुटबाजी में कमी न आना मुख्य कारण माने जा रहे हैं, जिनके चलते यह स्थिति आई।

यह उत्तराखंड की उपेक्षा नहीं, बल्कि जानबूझकर दिया गया ‘दंड’ है, हालांकि इसका असली खामियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ेगा और विकास कार्यों में इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

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