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नगर निगमों को सरकार देने जा रही नए साल का तोहफा, वित्तीय अधिकारों में होगी कई गुना बढ़ोतरी

Sun, 23 Dec 2018 05:30 AM IST
अलका त्यागी विपिन बनियाल/अमर उजाला, देहरादून
विपिन बनियाल/अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 23 Dec 2018 05:30 AM IST
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Uttarakhand nagar nigam financial right become more powerful in new year 2019
dehradun nagar nigam

नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत से उत्साहित सरकार अब नगर निगमों की ताकत बढ़ाने जा रही है। नगर आयुक्त, कार्यकारिणी समिति और बोर्ड के बजट स्वीकृत करने के अधिकार में कई गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। सरकार मेयर को भी 25 लाख तक के बजट की मंजूरी का अधिकार देने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव पर सरकार की अंतिम मुहर लगती है, तो नगर निगम बोर्डों को दस लाख की जगह एक करोड़ तक के बजट की मंजूरी का अधिकार मिल जाएगा। 

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दरअसल, राज्य निर्माण के वक्त वर्ष 2000 में नगर आयुक्त, कार्यकारिणी समिति और बोर्ड के जो वित्तीय अधिकार थे, उनमें आज तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस दौरान उत्तर प्रदेश में इसी तरह की स्थिति में वित्तीय अधिकार काफी बढ़ चुके हैं। दून नगर निगम एक प्रस्ताव के माध्यम से सारी स्थिति को सरकार के सामने लाया है। शहरी विकास निदेशालय से होते हुए यह प्रस्ताव शासन में पहुंच चुका है।
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सरकार प्रस्ताव की तमाम सारी बातों से सैद्घांतिक तौर पर सहमत है। राज्य बनने के बाद 18 सालों में निर्माण कार्यों की लागत और सामग्रियों के मूल्य में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस अनुपात में वित्तीय अधिकार न बढ़ने से तेजी से विकास कार्य करने में नगर निगमों को दिक्कत पेश आ रही है। प्रस्ताव सामने रखने का सबसे मजबूत आधार ये ही बनाया गया है।
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वित्तीय स्वीकृति का अधिकार
नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 135 और 136 के अंतर्गत नगर आयुक्त, महापौर, कार्यकारिणी समिति और बोर्ड को किसी कार्य या कार्यों के समूह के लिए अलग-अलग वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। यूपी के जमाने का यह अधिनियम उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2000 से यहां भी लागू है; हालांकि 2000 के बाद यूपी ने समय-समय पर अपने यहां वित्तीय स्वीकृति के अधिकार में इजाफा किया है, मगर उत्तराखंड में स्थिति जस की तस है। अब इसे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
 

इस फैसले से ये होगा फायदा

मौजूदा स्थितियों में नगर निगम के निर्वाचित बोर्ड को अधिकतम दस लाख रूपये तक के निर्माण कार्य स्वीकृत करने का अधिकार है। निर्माण कार्य की लागत इससे जरा सी भी ज्यादा होने पर उसे मंजूरी के लिए शासन को भेजना पड़ता है। नगर आयुक्त, महापौर, कार्यकारिणी समिति के वित्तीय स्वीकृति के अधिकार तो दस लाख से भी कम है। निगमों के अधिकार बढ़ते हैं, तो फिर उसकी निर्भरता शासन पर कम होगी। विकास कार्यों के संबंध में बजट स्वीकृति में त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।

अधिकार किसको कितने
पद             वर्तमान स्थिति        प्रस्तावित (रुपये में)
नगर आयुक्त      पांच लाख          15 लाख
कार्यकारिणी समिति पांच लाख          50 लाख
बोर्ड              10 लाख            एक करोड़

यूपी में किसको कितने अधिकार
नगर आयुक्त            10 लाख रुपये
कार्यकारिणी समिति      20 लाख रुपये
बोर्ड                     30 लाख रुपये

-सरकार नगर निकायों की मजबूती के लिए गंभीरता से काम करने जा रही है। नगर निकायों को हर लिहाज से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। वित्तीय अधिकार संबंधी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

-मदन कौशिक, नगर विकास मंत्री, उत्तराखंड।

-नगर निगम दून के स्तर पर शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें नगर आयुक्त, मेयर, कार्यकारिणी और बोर्ड के वित्तीय अधिकार बढ़ाने की बात कही गई है। ऐसा न होने के कारण विकास कार्यों में दिक्कतें हो रही हैं।
-विजय जोगदंड, नगर आयुक्त, नगर निगम देहरादून।
 

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