'व्हाइट गोल्ड' के लिए लड़ रहे उत्तराखंड सरकार के मंत्री
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उत्तराखंड सरकार के मंत्री कुर्सी के लिए नहीं बल्कि 'व्हाइट गोल्ड' के लिए लड़ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि कांग्रेस शासन में मंत्रियों की लड़ाई व्हाइट गोल्ड (रेता-बजरी) हासिल करने तक सीमित होकर रह गई है।
उन्होंने दावा किया कि यदि उत्तराखंड में खनन की जांच कराई जाए तो अधिकांश में मंत्रियों के चहेते, रिश्तेदारों की संलिप्तता उजागर होगी।
नई सरकार में चेहरे जरूर बदले हैं, लेकिन सरकार पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। इस बार भ्रष्टाचार की सीमा कहीं ज्यादा है।
नैनीताल के राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत में श्री भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार महंगाई रोकने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिससे चार बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हुईं हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट लगाकर जनता को छला है।
‘वजन’ देखकर हो रही अधिकारियों की तैनाती
नेता प्रतिपक्ष ने हीरो मोटोकार्प को 2006 में दी गई 214 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री किए जाने के प्रकरण को भी उठाया, जिसमें 1 अरब 11 करोड़ जुर्माना लगाया गया है। एफएलटू को बेनकाब करने में भी उनकी भूमिका रही।
13वें वित्त आयोग की 1200 करोड़ की राशि में से 400 करोड़ खर्च कर पाना सवालिया निशान है। वहीं, हल्द्वानी में उन्होंने कहा कि आगामी शीतकालीन सत्र में विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरेगी। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जिला स्तर के अधिकारियों की तैनाती ‘वजन’ देखकर हो रही है। तैनाती में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है।
भू-खरीद का शासनादेश वापस कराने को बनाएं दबाव
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधि विशेषज्ञों और जानकारों के अनुसार भू-खरीद का नया शासनादेश भू-माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। यह शासनादेश गरीब किसानों को जमीन से वंचित करने की साजिश है।
इतनी बड़ी जमीन भूमाफिया ही खरीद सकते हैं और वह छोटे-छोटे प्लाट काटकर प्रॉपर्टी डीलरों के माध्यम से बेचेंगे। इस मामले को भी उन्होंने सरकार के समक्ष रखा है और पार्टी इसका पूरा विरोध करेगी। सरकार को यह शासनादेश वापस लेना ही होगा।