उत्तराखंड : अनिवार्य सेवानिवृत्ति की समयसीमा तय, 15 जनवरी तक जारी हो जाएंगे आदेश
- गाइड लाइन जारी : कार्मिक विभाग ने स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया, नवंबर तक पूरी होगी प्रक्रिया
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राज्य सरकार की सेवाओं में कार्यरत 50 वर्ष की आयु प्राप्त सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए गाइडलाइन तय कर दी गई है। 15 जनवरी तक नियुक्ति अधिकारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश जारी कर देगा। नवंबर तक स्क्रीनिंग कमेटियों की बैठक और अन्य प्रक्रिया पूरी होगी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कार्मिक विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए हैं।
सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों को जारी आदेश के मुताबिक, सरकार ने सरकारी सेवकों के स्तर के हिसाब से स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है। आदेश के मुताबिक वित्तीय हस्तपुस्तिका में नियुक्ति अधिकारी 50 वर्ष व इससे अधिक की आयु वाले सरकारी सेवक को बिना कोई कारण बताए तीन महीने के नोटिस अथवा तीन महीने का वेतन देकर जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्त करने की व्यवस्था है।
स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर नियुक्ति प्राधिकारी विभागीय मंत्री/मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही आदेश जारी करेगा। सरकारी सेवक के सेवाकाल के सभी सेवा दस्तावेजों को देखा जाएगा। विशेषरूप से अंतिम 10 वर्ष के अभिलेखों पर ध्यान दिया जाएगा। कार्मिक की समीक्षा कार्यदक्षता और सत्यनिष्ठा के आधार पर की जाएगी।
स्क्रीनिंग कमेटी का कोई विधिक स्टेटस नहीं होगा। 31 मार्च तक सभी प्रशासनिक विभाग के सचिवों के माध्यम से अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव कार्मिक विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे। इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी।
किस सेवा के अधिकारी के लिए कौन सी स्क्रीनिंग कमेटी
1.जिन अधिकारियों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं : विभागाध्यक्ष व अपर विभागाध्यक्ष : मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी। इसमें प्रशासनिक विभाग के सचिव व कार्मिक विभाग के एसीएस/ प्रमुख सचिव/ सचिव सदस्य होंगे।
2.सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारी (डिप्टी कलेक्टर सहित) मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में कार्मिक विभाग के एसीएस/प्रमुख सचिव/सचिव व मुख्य राजस्व आयुक्त सदस्य होंगे।
3.सचिवालय सेवा अधिकारी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में कार्मिक विभाग के एसीएस/प्रमुख सचिव/सचिव व सचिव, सचिवालय प्रशासन।
4. विभिन्न विभागीय अधिकारियों के संबंध में प्रशासकीय विभाग के एसीएस/प्रमुख सचिव/ सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति। सचिव कार्मिक व संबंधित विभाग का एचओडी सदस्य होंगे ( ऐसी सभी समितियों के सदस्य सचिव विभागीय सचिव/ प्रभारी सचिव या अपर सचिव होंगे)।
5. जहां राज्यपाल नियुक्ति प्राधिकारी नहीं। विभागाध्यक्ष नियुक्ति प्राधिकारी है अपर विभागाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष नामित वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति। एचओडी द्वारा नामित दो अन्य अधिकारी सदस्य होंगे।
6. एचओडी से भिन्न नियुक्ति प्राधिकारी एचओडी द्वारा नामित तीन अधिकारियों में से सीनियर की अध्यक्षता में गठित समिति व एचओडी द्वारा नामित दो अधिकारी सदस्य होंगे। इन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है: शासनादेश में सर्वोच्च न्यायालय गुजरात राज्य बनाम उम्मेद भाई एम पटेल के केस में मार्गदर्शक सिद्धांतों का भी जिक्र किया गया है।
7. ऐसे कार्मिक जो सामान्य प्रशासन के लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं। अनिवार्य सेवानिवृत्ति को दंडस्वरूप नहीं माना जाएगा। संपूर्ण रिकार्ड ध्यान में रखकर आदेश पारित होंगे। गोपनीय रिकार्ड व प्रविष्टि पर विचार किया जाएगा।
विभागीय जांच से बचने के लिए सीआरएस के आदेश नहीं जारी होंगे। ऐसे मामलों में नैसर्गिक न्याय के सिद्धां को कोई स्थान नहीं है।