उत्तराखंड: यूपी के विधायक अमनमणि को पास जारी करने के मामले की होगी जांच, नप सकते हैं कई आला अफसर
- अपर मुख्य सचिव और जिलाधिकारी की भूमिका सवालों के घेरे में
- सरकार ने माना पास जारी करना गंभीर चूक, रिपोर्ट मिलते ही होगी कार्रवाई
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यूपी के निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी को बदरीनाथ और केदारनाथ का वाहन पास देने के मामले की जांच होगी। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश और जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव का कार्यालय सवालों के घेरे में हैं। शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अनुसार प्रकरण की पूरी जांच कराई जाएगी।
यूपी के महाराजगंज जिले की नौतनवा से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी की तीन गाड़ियों और आठ लोगों को जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून से श्रीनगर, बदरीनाथ, केदारनाथ के लिए चार दिन का पास जारी किया गया था। पास जारी करने की वजह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के स्व.पिता के पितृ कार्य के लिए बदरीनाथ धाम जाने और वहां से केदारनाथ धाम जाने को बताया गया था। इसी पास के आधार पर विधायक अमनमणि का काफिला रविवार को कर्णप्रयाग तक पहुंच गया। कर्णप्रयाग पुलिस ने उन्हें रोक लिया और उनकी यात्रा और पास को लॉकडाउन की गाइडलाइन के विपरीत बताते हुए बैरंग लौटा दिया।
वापसी में विधायक की ऋषिकेश के पास मुनिकीरेती में पुलिस के साथ कहासुनी हुई। विधायक ने दबंगई दिखाई और अभद्रता की, तो पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ा। अब सवाल उठा कि विधायक कर्णप्रयाग तक कैसे पहुंचे। लॉकडाउन के बीच जहां इंटर स्टेट आवाजाही प्रतिबंधित है और विशेष परिस्थितियों में पास जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में यूपी के विधायक को किसने पास जारी किया। पुलिस की जानकारी में आया कि पास देहरादून के एडीएम की ओर से जारी किया गया है। इसके बाद यह खुलासा हुआ कि जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने पास जारी करने के लिए पत्र भेजा था।
अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के सिफारिशी पत्र से मामले ने तूल पकड़ लिया है कि बदरीनाथ के कपाट बंद होने के बावजूद उन्होंने जिलाधिकारी से सिफारिश क्यों की? सोशल मीडिया पर घिरने के बाद सरकार हरकत में आई। शासकीय प्रवक्ता ने मामले की जांच करवाने की बात कही।
यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी की गाड़ियों को बदरीनाथ और केदारनाथ जाने के लिए पास जारी करने का मामला बेहद गंभीर है। चूक किस स्तर से हुई है और क्यों हुई है इसकी पड़ताल की जा रही है। विधायक काफिले के साथ कर्णप्रयाग तक कैसे पहुंच गए, इसकी भी जांच होगी। जिस धाम के अभी कपाट तक नहीं खुले और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार जिस धाम में अभी तक लोगों को दर्शन की इजाजत नहीं है। वहां के लिए यूपी विधायक समेत अन्य को पास जारी किया जाना गंभीर चूक है। सरकार ने इस पूरे प्रकरण का परीक्षण करवाने का
निर्णय लिया है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री
लॉकडाउन के दौरान किसी को आवाजाही के लिए वाहन पास मेरे स्तर से जारी नहीं होता है। उत्तर प्रदेश के विधायक की ओर से पत्र आया था। उसी के आधार पर जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया था।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव
सही से हुई जांच तो नपेंगे आला अफसर
विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके साथियों को बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए पास जारी करने पर सरकार ने जांच बैठाई है। सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच कौन कर रहा है। चूंकि इस मामले में उच्च आईएएस अधिकारियों पर आरोप है, ऐसे में प्रकरण पर सबकी नजर टिकी है। माना जा रहा है कि सही से जांच होने पर आला अफसर नप सकते हैं।
विधायक अमनमणि को लॉकडाउन के दौरान पास जारी करने में गड़बड़ी उच्च स्तर से शुरू हुई। निचले अधिकारियों ने भी इस और ध्यान नहीं दिया कि पास जारी करने की वजह सही है या गलत। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश की ओर से जारी पत्र को केंद्रीय गाइडलाइन से ऊपर मानकर सभी नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया। इतनी बड़ी प्रशासनिक चूक पर जब सोशल मीडिया में फजीहत हुई तो प्रकरण की जांच करने की बात सामने आई।
शासन स्तर पर सभी अधिकारी इस प्रकरण में बयान देने से बचे। कोविड19 को लेकर सचिवालय के मीडिया सेंटर में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में मुख्य सचिव के नहीं आने पर पहुंचे अन्य अधिकारी इस मामले से संबंधित सवालों से बचते रहे। इन अधिकारियों ने मामले से अनभिज्ञता जता दी। उधर, सरकार की ओर से शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए जांच करवाने की बात कही, लेकिन किस स्तर से जांच हो रही है, इसकी जानकारी उन्होंने भी नहीं दी।
लीपापोती की आशंका जता रहा है विपक्ष
सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच करवाने की बात कही है, लेकिन विपक्ष को आशंका है कि कहीं पूरे मामले में लीपापोती न हो जाए। विपक्ष का कहना है कि इस प्रकरण में उच्च अधिकारियों के स्तर से लापरवाही सामने आ रही है, ऐसे में सरकार को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए। विपक्ष का सवाल है कि सरकार उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई से बचते हुए जांच का बहाना तो नहीं बना रही।