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Lockdown: कोरोना पीड़ित बुजुर्ग जमाती की आपबीती, कहा- दिल में गम है कि मेरी वजह से मुसीबत में पड़ी हजारों लोगों की जान

Thu, 16 Apr 2020 11:30 AM IST
अलका त्यागी सत्यपाल सैनी, अमर उजाला, भगवानपुर (रुड़की)
सत्यपाल सैनी, अमर उजाला, भगवानपुर (रुड़की) Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 16 Apr 2020 11:30 AM IST
सार

  • कोरोना पीड़ित बुजुर्ग ने कहा मैं तो दो घंटे के लिए गया था मरकज में

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Uttarakhand Lockdown: Corona positive Old Age man Told His Aapbeeti And Regret to go in jamaat
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

‘कोरोना के चलते मुझे कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन दिल में इस बात का भारी गम है कि मेरी वजह से गांव के हजारों ग्रामीण अब मुसीबत झेल रहे हैं।’ यह कहना है कि महज दो घंटे के लिए दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में जाने वाले मानक मजरा निवासी 62 वर्षीय कोरोना संक्रमित बुजुर्ग का।

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हरिद्वार के मेला अस्पताल में भर्ती कोरोना पीड़ित बुजुर्ग ने ‘अमर उजाला’ से मोबाइल पर हुई बातचीत में बताया कि 20 मार्च को एक बाबा ने उनसे दिल्ली मरकज में आयोजित जमात में चलने को कहा था। किसी कारणवश बाबा तो नहीं गया, लेकिन वह गांव के ही दो लोगों के साथ शाम तीन बजे ट्रेन में बैठे और रात करीब दस बजे निजामुद्दीन मरकज में पहुंचे।
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उस वक्त वहां कोई धार्मिक आयोजन नहीं होने के चलते तीनों ने आराम करने की सोची। मरकज में जगह कम थी, इसलिए वे रात में रुकने के लिए पास की ही एक मस्जिद में चले गए। अगले दिन फिर मरकज में पहुंचे और वहां करीब दो घंटे का वक्त गुजारा।

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जिगंदीभर रहेगा वहां जाने का गम

इसी दौरान लॉकडाउन की आहट मिलने लगी। लिहाजा सुबह 11.30 बजे तीनों वहां से निकल पड़े। बुजुर्ग का कहना है कि यही दो घंटे मरकज में गुजारना उनके लिए खतरनाक साबित हुआ और वे कोरोना की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि कोरोना से तो उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं, लेकिन इस बात का पूरी जिंदगी गम रहेगा कि उनकी वजह से पूरे गांव को कितनी तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं।

22 बीघा सब्जी की खेती हो जाएगी बेकार
कोरोना पीड़ित बुजुर्ग ने बताया कि उनके परिवार के आठ लोग क्वारंटीन हैं। उन्होंने 22 बीघा जमीन में सब्जी की खेती की हुई है। इसमें छह बीघा जमीन उनकी खुद की है जबकि 16 बीघा जमीन किराए पर लेकर सब्जी उगाई थी। अब इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

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