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उत्तराखंड भू-कानून: भू-कानून की मांग को लेकर सड़क पर उतरे युवा, बनाई मानव श्रंखला
Sun, 25 Jul 2021 01:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 25 Jul 2021 01:28 PM IST
सार
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) उत्तराखंड के अध्यक्ष विपुल डावर का कहना है कि प्रदेश में जमीन की खरीद फरोख्त धंधा बन रहा है। इस पर नियंत्रण करने के लिए भू-कानून बनाया जाता है तो वह प्रदेश के लोगों के हित में है।
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उत्तराखंड भू-कानून
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सोशल मीडिया से शुरू हुई उत्तराखंड भू-कानून की मांग अब उत्तराखंड की सड़कों पर भी उतर चुकी है। कई दिनों से उत्तराखंड में भू-कानून की मांग को लेकर प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी क्रम में रविवार को देहरादून और हल्द्वानी में युवाओं ने मानव श्रंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया।
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उत्तराखंड में जमीन खरीद फरोख्त का धंधा न बने, बल्कि विकास का आधार बने। विकास कार्यों और औद्योगिक निवेश की योजना में जमीन की रुकावट नहीं आनी चाहिए। जब विकास और निवेश होगा, तभी पहाड़ तरक्की की रास्ते पर आगे बढ़ेगा। प्रदेश में भू-कानून की मांग पर विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने यह राय दी है।
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) उत्तराखंड के अध्यक्ष विपुल डावर का कहना है कि प्रदेश में जमीन की खरीद फरोख्त धंधा बन रहा है। इस पर नियंत्रण करने के लिए भू-कानून बनाया जाता है तो वह प्रदेश के लोगों के हित में है। औद्योगिक निवेश और अन्य विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध होनी चाहिए। जब प्रदेश में निवेश होगा तभी रोजगार के अवसर खुलेंगे। यदि निवेशकों को जमीन नहीं मिलेगी तो वे उत्तराखंड में नहीं आएंगे।
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इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता का कहना है कि विकास में भूमि की रुकावट नहीं होनी चाहिए। जमीन किस मकसद से खरीदी जा रही है। इस पर नजर रखने को कानून होना चाहिए। जिस उद्देश्य के लिए जमीन खरीदी जा रही है, उसका उपयोग उसी के लिए होना चाहिए। साथ ही जमीन खरीदने के बाद निवेश योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। तभी पहाड़ के लोगों को लाभ मिलेगा। पहाड़ों में जब उद्योग नहीं लगेंगे तो रोजगार नहीं मिलेगा और पलायन की समस्या बढ़ेगी।
सबके लिए एक ही तरह भूमि कानून बनाने से उद्योगों को जमीन नहीं मिलेगी और निवेशक दूसरे राज्यों में निवेश करने के लिए जाएंगे। पीएचडी चैंबर आफ कामर्स इंडस्ट्री के निदेशक अनिल तनेजा है कि सरकार ने कृषि व हाउसिंग के लिए भूमि खरीदने पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। प्रदेश में पहले ही नए उद्योग लगाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। भू-कानून बनने से औद्योगिक निवेश भी प्रभावित होगा।