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उत्तराखंड भू-कानून: सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम राजनीतिक दलों ने लपकी, मेनिफेस्टो में शामिल होगा मुद्दा
Mon, 26 Jul 2021 03:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 26 Jul 2021 03:52 PM IST
सार
उत्तराखंड में सक्रिय वाम दल, उत्तराखंड क्रांति दल राज्य में पहले से ही सशक्त भू-कानून की मांग करते रहे हैं।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सोशल मीडिया पर शुरू हुई राज्य में भू-कानून में सुधार की मांग को राजनीतिक दलों ने लपकने में कोई देर नहीं लगाई। लेकिन मुद्दा अब भी वही है, क्या प्रमुख राजनीतिक दल आने वाले दिनों में इस मुद्दे को अपने मेनिफेस्टो में शामिल करेंगे या सत्ताधारी भाजपा सरकार जनता की नब्ज को समझते हुए चुनावों से पहले ही इसमें सुधार कर देगी। जैसे की मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों संकेत भी दिए हैं।
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उत्तराखंड में सक्रिय वाम दल, उत्तराखंड क्रांति दल राज्य में पहले से ही सशक्त भू-कानून की मांग करते रहे हैं। इधर, आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे का जबरदस्त ढंग से समर्थन किया है। कांग्रेस इसे बकायदा अपने मेनिफेस्टो में लाने की बात कह रही है तो सत्ताधारी भाजपा नेताओं के सुर जुदा-जुदा से हैं।
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कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मुद्दे पर पुनर्विचार की बात कह चुके हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की राय बिल्कुल जुदा है। उनका कहना है कि फिलहाल भू-कानून में किसी प्रकार की सुधार की जरूरत नहीं है। उत्तराखंड की एक बड़ी आबादी राज्य से बाहर रहती है। ग्लोबलाइजशेन का दौर है, ऐसे में हमें खुद को सीमित दायरें में नहीं समेटना चाहिए। फिर राज्य में अगर मांग उठ रही है तो इस पर व्यापाक चर्चा की जानी चाहिए, फिर कोई फैसला लिया जाना चाहिए।
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इधर, मुख्य विपक्षी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लगातार भू-कानून में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि राज्य में उनकी सत्ता आती है कि सरकार बनने के पहले महीने में हिमाचल से भी बेहतर कानून लेकर आएंगे। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी विभिन्न मंचों कानून में सुधार की मांग कर चुके हैं।
2018 में सदन की कार्यवाही के दौरान विधेयक का विरोध करने वाले विपक्षी दल से केदारनाथ विधानसभा के कांग्रेसी विधायक मनोज रावत का कहना है कि तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार ने सदन में प्रदेश में नए विधेयक के आने से बड़े पूंजी-निवेश के दावे किए थे। अब वह उनसे पूछना चाहते हैं कि श्वेत पत्र जारी कर बताएं कि भूमि-कानून में खुली छूट से प्रदेश में अबतक कितना निवेश आया और इससे पलायन जैसे गंभीर मुद्दे पर कितनी सफलता मिली।
वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व वनाधिकार आंदोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय इसी मुद्दे पर कुछ अन्य अहम बिंदुओं को जोड़ते हुए कहते हैं, हमारे पास उत्तराखंड में अभी कृषि भूमि का रकबा लगभग नौ प्रतिशत है और जो प्रदेश में हम मांग बीते कुछ वर्षो से वनाधिकार कानून को लागू करने की मांग कर रहे हैं वह भी भू-कानून का एक अभिन्न हिस्सा है। हम नई दिल्ली में तक जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सत्ता में सरकार किसी की भी रहे जो कानून प्रदेश हित में हो, उसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए। इधर, कांग्रेस मेनिफेस्टो कमेटी में संयोजक बनाए गए पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि निश्चित तौर यह मुद्दा कांग्रेस के मेनिफेस्टो में शामिल होगा।