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सीएम के दखल के बाद सकते में परिवहन विभाग
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Sep 2013 03:21 PM IST
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उत्तराखंड में निजी बसों को इंटर स्टेट रूट परमिट जारी करने के मामले में अब राज्य परिवहन प्राधिकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम जहां फैसले के खिलाफ भड़की हुई है वहीं मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के जांच आदेश से मामला और गंभीर बना दिया है। कर्मचारियों के उग्र तेवर के बाद पूरे प्रकरण में परिवहन आयुक्त सहित एसटीए के पदाधिकारी घिरते दिख रहे हैं।
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प्राधिकरण का निर्णय
निजी बसों को इंटर स्टेट रूट परमिट जारी करने का प्राधिकरण का फैसला अब उलटा पड़ गया है। फैसले से परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश पूरी तरह से अनभिज्ञता जताते हुए इसे पूरी तरह से प्राधिकरण का निर्णय बता रहे हैं। मंत्री सुरेंद्र राकेश ने विभागीय सचिव से रिपोर्ट तलब कर फैसले को पूरी तरह से एसटीए का बताया है।
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उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि एसटीए निजी बसों को इंटर स्टेट रूट परमिट दे रहा है। ऐसे में उन्होंने निजी बसों को फायदा पहुंचाने के पीछे राजनीतिक दखल की आशंका पर विराम लगा दिया है।
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जांच के बाद सामने आएगा
परिवहन आयुक्त की हैसियत से विभागीय सचिव उमाकांत पंवार की अध्यक्षता में एसटीए ने यह फैसला क्यों लिया इसका जवाब तो जांच के बाद ही सामने आएगा। दूसरी तरफ परिवहन निगम पर हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने का दबाव है, जबकि एमडी खुद भी उस एसटीए का हिस्सा हैं जिसने यह फैसला 20 सितंबर को हुई बैठक में लिया है।
कारणों की जांच करवाई जाएमुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के रोडवेज कर्मचारी यूनियन को मामले की जांच करवाने का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारी इस बात पर अड़े हैं कि परमिट निरस्त करने के साथ फैसला देने के पीछे कारणों की जांच करवाई जाए। ऐसे में विभागीय रिपोर्ट और जांच के बाद ही यह साफ होगा कि आखिर विवादस्पद परमिट जारी करने के पीछे मंशा क्या रही।