उत्तराखंड में प्रशासनिक फेरबदल: मुख्यमंत्री धामी ने ताश के पत्तों की तरह फेंट डाली नौकरशाही
अब सचिवालय से लेकर ज्यादातर जिलों में धामी सरकार की पसंद की नौकरशाह तैनात हैं। बेशक चार जिलों के जिलाधिकारियों को बदल डाला गया है, लेकिन अभी भी एक-दो जिलों में डीएम की कुर्सी बदलेगी।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आखिरकार 34 और नौकरशाहों को ताश के पत्तों की तरह फेंट डाला। पिछले एक पखवाड़े में धामी सरकार का ये दूसरा बड़ा प्रशासनिक फेरबदल है।
माना जा रहा है कि इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब धामी राज की नौकरशाही पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल की छाया से काफी हद तक बाहर आ गई है। त्रिवेंद्र राज के हेवीवेट माने जाने वाले तकरीबन सभी नौकरशाहों की कुर्सियां बदली जा चुकी हैं।
अब सचिवालय से लेकर ज्यादातर जिलों में धामी सरकार की पसंद की नौकरशाह तैनात हैं। बेशक चार जिलों के जिलाधिकारियों को बदल डाला गया है, लेकिन अभी भी एक-दो जिलों में डीएम की कुर्सी बदलेगी। मुख्यमंत्री धामी पहले ही बड़े प्रशासनिक फेरबदल के संकेत दे चुके थे।
तय माने जाने वाले इस बदलाव में उम्मीद के अनुसार जिलाधिकारी स्वाति और नितिन भदौरिया के तबादले की संभावनाएं जताई जा रही थी। चमोली की डीएम रहते हुए स्वाति भदौरिया अपने कार्यकाल के दौरान निर्विवाद नहीं रह पाईं। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ आंदोलन तक हुए। स्वाति चमोली से विदा हुईं तो नितिन भदौरिया अल्मोड़ा से। अब दोनों शासन में अपर सचिव देखेंगे।
कुंभ मेला के आयोजन के बाद से हरिद्वार के जिलाधिकारी सी. रविशंकर की कुर्सी भी डोलती नजर आ रही थी। उन्हें सरकार ने शासन में अपर सचिव बना दिया और प्रभारी सचिव विनय शंकर पांडेय को हरिद्वार के जिले की कमान सौंप दी गई। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आनंद स्वरूप, अपर सचिव अतर सिंह, संयुक्त सचिव को अहम विभाग मिले हैं। डॉ. आशीष श्रीवास्तव को स्मार्ट सिटी के सीईओ से हटाकर शासन में अपर सचिव बना दिया गया है।
उनकी जगह स्मार्ट सिटी का जिम्मा देहरादून के जिलाधिकारी को दिया गया है। अपर सचिव डॉ. रामविलास यादव से समाज कल्याण विभाग हटा दिया गया है। वे लंबे समय से समाज कल्याण देख रहे थे। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव डॉ पंकज पांडेय, विजय कुमार यादव, डॉ. आर राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन को अतिरिक्त प्रभार देकर भारी किया गया है। इस पूरे प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब नौकरशाही की शतरंज पर मुख्यमंत्री धामी के अपने मोहरे हैं। अब देखना यही है कि बदले गए इन मोहरों से वह करीब पांच से छह महीने के छोटे से कार्यकाल में कितना काम ले पाते हैं।
दीपक रावत फिर मेलाधिकारी
यूपीसीएल, पिटकुल के एमडी बनाए गए दीपक रावत की फिर कुंभ मेलाधिकारी के पद पर वापसी हो गई। रावत एमडी पद पर भेजे जाने से नाखुश बताए जा रहे थे। चर्चा यहां तक थी कि अनिच्छा के बावजूद उन्होंने एमडी का पदभार लिया।
हालांकि बाद में उन्होंने विधिवत दायित्व ग्रहण कर लिया था। लेकिन हवाओं में फिर भी उनके जल्द विदाई की चर्चाएं तैर रही थीं, जो इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद सच साबित हुई। माना जा रहा है कि मेलाधिकारी पद से हटने के बाद कुंभ मेले की कार्यदायी एजेंसियों को होने वाले भुगतान संबंधी मामलों में दिक्कतें पैदा हो रही थीं। मेलाधिकारी की वापसी से अब इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
अभी जारी रहेगा प्रशासनिक बदलाव का सिलसिला
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि धामी सरकार में नौकरशाही में बदलाव का यह सिलसिला अभी नहीं थमा है। अभी कुछेक जिलाधिकारियों की कुर्सियां हिल सकती हैं। कहा यह भी जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले जिलाधिकारियों व कप्तानों को बदला जाना है। प्रशासनिक बदलाव की एक मुख्य वजह यह भी मानी जा रही है।
आएगी पुलिस कप्तानों के तबादलों की भी बारी
नौकरशाही में बदलाव की यह बयार यहीं नहीं थमेगी। पुलिस कप्तानों को भी बदले जाने की संभावनाएं हैं। आईपीएस अफसरों को बदलने के लिए गृह विभाग में होम वर्क शुरू हो गया है।