फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand hilly village women Grew up huge jungle

रंग लाई देवभूमि के इस गांव की महिलाओं की सालों की मेहनत, उगा दिया विशाल जंगल

Tue, 16 Apr 2019 02:45 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 16 Apr 2019 02:45 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand hilly village women Grew up huge jungle
फाइल फोटो

कर्णप्रयाग में लकड़ी, चारा-पत्ती और पानी की समस्या से निजात पाने के लिए 39 साल पहले शुरू की गई पुडियाणी गांव की महिलाओं की मेहनत रंग लाई है।

विज्ञापन


महिलाओं ने स्वयं के प्रयासों से गांव में बांज, बुरांश, काफल समेत कई पौधे लगाए थे जहां अब विशाल जंगल बन गया है। इस जंगल से आज गांव के पेयजल स्रोत रिचार्ज हो रहे हैं तो महिलाएं यहीं से अपनी जरूरतें पूरा करती हैं। जंगल की सुरक्षा के लिए समिति बनाकर अध्यक्ष और वन रक्षक भी रखा गया है।

विज्ञापन

करीब 210 परिवारों वाला है पुडियाणी गांव

कर्णप्रयाग शहर से 20 किमी दूर नौटी मोटर मार्ग पर करीब 210 परिवारों वाला पुडियाणी गांव है। 39 साल पहले इस गांव में पानी की भारी किल्लत थी। गांव के लोग कुएं के अलावा अन्य दूसरे गांवों से पानी लाकर पीते थे। ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण जलावनी लकड़ी और पशुओं के लिए चारा पत्ती की भी भारी कमी थी।

इन सब समस्याओं से निजात पाने के लिए गांव की महिलाओं ने एक समूह बनाया। योजनाबद्ध तरीके से गांव के पास बांज, फनियाट, बुरांश, काफल, कटकटी, अंग्याल के 400 पौधों को रोपा गया। गांव में पानी की भारी कमी थी, लिहाजा महिलाओं ने पीने के पानी से पौधों को सींचने के लिए पानी दिया।

जंगल में 450 से अधिक प्रजाति के करीब 10 लाख पेड़

आज इसी का परिणाम है कि पुडियाणी गांव के छह वर्ग किमी में फैले इस जंगल में 450 से अधिक प्रजाति के करीब 10 लाख पेड़ हैं। गांव के लोग बताते हैं कि महिलाओं ने पौधों को अपने बच्चों की तरह पाला। पीठ पर गोबर, खाद-पानी ढोकर पौधों को दिया।

वर्तमान समय में ये पेड़ जल स्रोतों को रिचार्ज कर लगभग 900 लोगों को पानी, चारा-पत्ती और जलावनी लकड़ी दे रहे हैं। साथ ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के जरिए गांव में ही रोजगार भी पैदा कर रहे हैं।

विज्ञापन

प्रति परिवार इकट्ठा करते हैं चंदा

पुडियाणी गांव की जिला पंचायत सदस्य गायत्री देवी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दिव्य दर्शन नेगी, डीडी सिंह, बलबीर सिंह आदि कहते हैं कि महिलाओं ने जब जंगल बसाने की नींव रखी तो शाकंबरी देवी को अध्यक्ष और पूरण सिंह नेगी को वन रक्षक चुना गया था। समिति में बुधाणी देवी, हेमा देवी, गायत्री देवी ने भी सहयोग गया।

पहले समिति थी अब पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा ममंद के पास है, इसमें अध्यक्ष लीला देवी हैं। वहीं सरपंच मदन सिंह भी पेड़ों की रखवाली में लगे रहते हैं। शुरुआत में जंगल के रख-रखाव के लिए प्रति परिवार दो रुपये चंदा किया जाता था। वर्तमान समय में भी गांव के लोग पांच-पांच रुपये चंदा एकत्र करके जंगल की सुरक्षा के लिए रखे गए व्यक्ति को वेतन के तौर पर देते हैं। समय-समय पर पेड़ों की मानीटरिंग भी की जाती है।

पौधों में लग रहे कीड़े

बासिला प्रजाति का खरपतवार और अज्ञात कीड़ा बांज के पौधों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।

पुडियाणी गांव में बांज का जंगल है। महिलाओं की ओर से तैयार किए गया जंगल अच्छी पहल है। यहां पेड़ों को आग से बचाने के लिए पूरे इंतजाम किए जाएंगे। आग बुझाने में विभाग ग्रामीणों का सहयोग भी लेता है।
- रेंजर प्रदीप गौड़, वन प्रभाग कर्णप्रयाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed