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उत्तराखंड: कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब

Wed, 27 Oct 2021 10:42 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 27 Oct 2021 10:42 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कॉर्बेट नेशनल पार्क के मोरघट्टी व पाखरो फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के आसपास अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

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Uttarakhand High Court summons answer in case of illegal construction in Corbett National Park
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण कार्यों, सड़कों व पुलों के संबंध में मीडिया में चल रही खबरों का स्वत: संज्ञान लिया है। याचिका के रूप में मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को आठ नवंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी बताने को कहा है कि पार्क में कौन-कौन से स्थानों पर अवैध निर्माण किया गया है। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

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दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कॉर्बेट नेशनल पार्क के मोरघट्टी व पाखरो फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के आसपास अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से उन्हें हटाने की मांग करते हुए कहा गया था कि इन निर्माण कार्यों को बंद करने से बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों को बचाया जा सकेगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने एनटीसीए को निर्देश दिए थे कि वे याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन का निपटारा करें। 
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एनटीसीए ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अवैध निर्माण कार्यों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की। कमेटी ने जांच में पाया कि नेशनल पार्क के मोरघट्टी व एफआरएच परिसर के कई क्षेत्रों में अवैध निर्माण कार्य चल रहे हैं। इनमें होटल, भवन, पुल और सड़क आदि शामिल हैं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन को निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों से शीघ्र अवैध निर्माणों को हटाया जाए। जिन अधिकारियों की अनुमति से ये निर्माण कार्य किए गए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि वन विभाग के अधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972, इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 व फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 का उल्लंघन किया है।
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12 अगस्त 2021 को चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन को पत्र भेजकर मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके इस पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके चलते एनटीसीए ने जांच के लिए 24 अक्टूबर 2021 को कमेटी यहां भेजी। कोर्ट ने मीडिया में चल रही खबरों का स्वत: संज्ञान लेकर केंद्र सरकार, मुख्य सचिव उत्तराखंड, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार, उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ एडवाजरी बोर्ड, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ वॉर्डन और संबंधित क्षेत्र के डीएफओ को पक्षकार बनाया है।

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