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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: सारे बाघों-हाथियों को गुजरात के नेशनल पार्क में क्यों न शिफ्ट कर दिया जाए

Fri, 10 Aug 2018 05:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 10 Aug 2018 05:54 PM IST
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uttarakhand high court said why not shift all tiger and elephant in gujarat
nainital high court - फोटो : google

कार्बेट और राजाजी पार्क की व्यवस्था पर अफसरों के गलत जवाब से नाराज हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों न सारे बाघों और हाथियों को गुजरात के नेशनल पार्क में शिफ्ट कर दिया जाए।

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हाईकोर्ट के आदेश पर अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को जवाब पेश तो किया लेकिन वह अपने  ही जवाब में फंस गए। उन्होंने शपथ पत्र में रिकार्ड संलग्न होने की जानकारी दी, जो संलग्न नहीं था। अदालत ने इसे उनकी लापरवाही माना। जवाब से असंतुष्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की पीठ ने कहा कि सरकार पहले पारित किए गए कोर्ट के आदेश को तोड़मरोड़ कर अदालत को गुमराह कर रही है। 
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अदालत ने छह अगस्त को अपर मुख्य सचिव की ओर से प्रस्तुत जवाब पर असंतोष जताते हुए नौ अगस्त को दोबारा शपथ पत्र कोर्ट में पेश करने को कहा था। उस समय अपर मुख्य सचिव पार्क से अतिक्रमण हटाने और टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स सक्रिय करने की समय सीमा नहीं बता पाए थे। एसीएस के शपथ पत्र पर बृहस्पतिवार को भी कोर्ट ने कई सवाल उठाए।
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कोर्ट ने कहा कि कार्बेट के प्रत्येक जोन में 20 गाड़ियों तक के प्रवेश की अनुमति का निर्देश दिया गया था। एसीएस के शपथ पत्र में प्रत्येक जोन में 100-100 गाड़ियों के प्रवेश की जानकारी दी है। शपथ पत्र में पार्क से संबंधित रिकार्ड संलग्न होने की जानकारी दी गई है। यह रिकार्ड संलग्न नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी अपर मुख्य सचिव की लापरवाही है। कोर्ट में एसीएस ने बताया कि वे सारा रिकॉर्ड लेकर मालसी रेंज के फारेस्ट गार्ड अंकुर शर्मा के पास गए। अंकुर शर्मा ने रिकॉर्ड की जांच की और रिकार्ड सत्यापित किया था। 

एसीएस और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक तलब

uttarakhand high court said why not shift all tiger and elephant in gujarat
कॉर्बेट नेशनल पार्क - फोटो : अमरउजाला

जवाब से नाराज कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक राजीव भरतरी को दस अगस्त (शुक्रवार) को दो बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पूर्व में पूछे गए सवालों की जानकारी दोनों अधिकारी स्पष्ट रूप से दें।

ये पूछा था कोर्ट ने..... 
कार्बेट पार्क में रिजार्ट किस अधिनियम के तहत संचालित हो रहे हैं? रात में पर्यटकों को इन गेस्ट हाउसों में क्यों ठहरने दिया जा रहा है?
स्पेशल टाइगर फोर्स काम क्यों नहीं कर पा रही है? वन क्षेत्र में रह रहे गुर्जरों को कब तक शिफ्ट करेंगे? कार्बेट की छह रेंज में कितनी गाड़ियों के प्रवेश की अनुमति है?

क्या था मामला....
कार्बेट नेशनल पार्क में अतिक्रमण के संबंध में हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्थान ने जनहित याचिका दायर की थी। इसी तरह राज्य सभा सदस्य अनिल बलूनी ने भी वन गुर्जरों से संबंधित याचिका 2012 में दाखिल की थी। इन सारी याचिकाओें पर कोर्ट संयुक्त रूप से सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने दो अगस्त को प्रदेश के मुख्य सचिव को शपथ पत्र पेश करने का कहा था।

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