हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से किया आग्रह, उत्तराखंड में डेंगू से बचाव के लिए दी जाए अधिक सहायता
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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह डेंगू पर नियंत्रण के लिए उत्तराखंड को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को राज्य में डेंगू के इलाज के लिए अस्पतालों की संख्या बढ़ाने और प्रत्येक अस्पताल में डेंगू प्रभावित मरीजों की भर्ती के लिए अलग से वार्ड बनाने के भी निर्देश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने देहरादून निवासी रोहित ध्यानी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। ध्यानी का कहना था कि प्रदेश में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड और बिस्तरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2016 में डेंगू के 2146 मरीज पाए गए थे। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेश के प्रत्येक अस्पताल में डेंगू किट और दवाइयां उपलब्ध हैं। डेंगू प्रभावित सभी जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू नैदानिक किट भी हैं।
केंद्र सरकार की ओर से ‘रक्षक’ नामित दून अस्पताल, जौलीग्रांट अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल हल्द्वानी, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल रुद्रपुर और कोरोनेशन अस्पताल दून में डेंगू की जांच निशुल्क की जाती है।
ये अस्पताल डेंगू पर नियंत्रण और निगरानी का काम भी कर रहे हैं। खंडपीठ ने पाया कि डेंगू के नियंत्रण के लिए राज्य में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश में डेंगू की रोकथाम का काम करने वाले अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।