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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने सरकार को दिए अतिक्रमण हटाने के लिए समय तय कर शपथपत्र देने के आदेश
Mon, 02 Nov 2020 10:48 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 02 Nov 2020 10:48 PM IST
सार
- चिदानंद मुनि के रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण करने का मामला
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने चिदानंद मुनि की ओर से वीरपुर खुर्द वीरभद्र, ऋषिकेश में रिजर्व फॉरेस्ट की 35 बीघा भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मंगलवार 3 नवंबर को भी सुनवाई जारी रखी है। सोमवार को कोर्ट ने राज्य सरकार को अतिक्रमण हटाने के लिए समय तय कर शपथपत्र पेश करने के आदेश दिए हैं।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी अर्चना शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऋषिकेश के निकट वीरपुर खुर्द वीरभद्र में चिदानंद मुनि ने रिजर्व फॉरेस्ट की 35 बीघा भूमि पर कब्जा किया हुआ है। इस भूमि पर अवैध निर्माण कर 52 कमरे, एक बड़ा हॉल और गोशाला बनाई गई है।
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चिदानंद के रसूखदारों से संबंध होने के कारण वन विभाग व राजस्व विभाग की ओर से भी इसकी अनदेखी की जा रही है। याचिका में कहा कि इस संबंध में कई बार प्रशासन तथा वन विभाग को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने भूमि से अतिक्रमण हटाकर इसे सरकार को सौंपने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुनवाई जारी रखते हुए राज्य सरकार को अतिक्रमण हटाने के लिए समय तय कर शपथपत्र पेश करने के आदेश दिए हैं।
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