पंजाब से मुक्त कराए गए प्रत्येक बंधुआ मजदूर को 20 हजार रुपए का भुगतान करें: हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने पंजाब से मुक्त कराये हरिद्वार जनपद के बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास को लेकर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार और जिलाधिकारी हरिद्वार को प्रत्येक बंधुआ मजदूर को 20 हजार की धनराशि बतौर सहायता देने के निर्देश दिये हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने दिल्ली निवासी निर्मल गोराना बंधुआ मुक्ति मोर्चा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि धनराशि का भुगतान चेक के जरिए ही किया जाए।
याची का कहना था कि ग्राम मोहपुर रुड़की (हरिद्वार) के 18 बंधुआ मजदूरों को आलमवाला, मोंगा, पंजाब से मुक्त कराया गया था। 22 जून 2014 को उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार से इन मजदूरों की देखभाल व खाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया था। जिलाधिकारी ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की। याची ने बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास की व्यवस्था करने और इसके लिए नियम भी बनाने का आग्रह किया।