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उत्तराखंड: फर्जी शिक्षक मामले में हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को जिलेवार रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

Tue, 17 Mar 2020 08:57 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 17 Mar 2020 08:57 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से 15 अप्रैल तक रिपोर्ट देने को कहा

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Uttarakhand high court order to education secretary for Fake Teacher Investigation District Wise
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हाईकोर्ट ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले अध्यापकों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद शिक्षा सचिव को फर्जी टीचरों की जिलेवार जांच कर 15 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

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काठगोदाम की स्टूडेंट्स गार्जियन वेलफेयर कमेटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के सरकारी स्कूलों में लगभग 3500 टीचरों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाई है। एसआईटी ने 2018 में इसकी जांच की थी।
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इसमें करीब 100 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए और 53 के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद वे अपने पदों पर उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से बने हुए हैं।
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याचिकाकर्ता ने इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने व उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की मांग की है जो कुछ शिक्षकों के फर्जी प्रमाणपत्रों को सही ठहरा रहे हैं। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शिक्षा सचिव को जिलेवार फर्जी शिक्षकों की जांच कर 15 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के डीएम को 20 तक जांच रिपोर्ट देने के निर्देश

हाईकोर्ट ने ढप्टी कांडा बागेश्वर में अवैध रूप से किए जा रहे खड़िया खनन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद डीएम बागेश्वर को 20 मार्च तक पर्यावरण बोर्ड के अनुमति प्रमाणपत्र व पूर्व में की गई जांच की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि खनन के लिए पर्यावरण बोर्ड की उन्हें अनुमति मिली हुई है और प्रशासन की ओर से पूर्व में इसकी जांच की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ढप्टी कांडा निवासी बलवंत धामी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका कर कहा था कि उनके गांव में कुछ लोगों द्वारा खड़िया खनन किया जा रहा है। याचिका में कहा कि ये लोग लीज पर दिए गए पट्टों के अलावा गांव के अन्य लोगों की भूमि से भी खनन कर रहे हैं।

याचिका में कहा कि इसकी शिकायत उन्होंने प्रशासन से की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट एसडीएम ने उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने डीएम बागेश्वर को 20 मार्च तक पर्यावरण बोर्ड के अनुमति प्रमाणपत्र व पूर्व में की गई जांच की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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