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अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट का आदेश, प्रतिशपथ पत्र दाखिल करें स्वामी चिदानंद मुनि और याचिकाकर्ता

Tue, 07 Jan 2020 11:58 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 07 Jan 2020 11:58 PM IST
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Uttarakhand High court order to Chidanand Muni in Encroachment case
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

नैनीताल हाईकोर्ट ने ऋषिकेश में गंगा नदी किनारे अतिक्रमण करने, अधिकारियों से मिलीभगत कर आश्रम बनाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता और स्वामी चिदानंद मुनि को प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तिथि नियत की।

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 इस प्रकरण में पौड़ी गढ़वाल के डीएम धीराज गर्ब्याल की ओर से कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई है। इसमें कहा गया कि 1956-57 में 2.3912 एकड़ लीज भूमि स्वामी सुखदेवानंद ट्रस्ट परमार्थ निकेतन को वन प्रभाग लैंसडौन की ओर से स्वीकृत की गई थी। भूमिधरी की भूमि पर छोटे-बड़े 833 कमरे, खाली पार्किंग, चार दुकानें, रास्ते और दो बैंक हैं।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में गंगा किनारे 70 मीटर के दायरे में कब्जा किया गया है जो सरकारी भूमि है। याचिका में कहा कि गंगा में पुल का निर्माण कर नदी में एक मूर्ति बनाने के साथ ही व्यावसायिक भवन का निर्माण किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से इस पर रोक लगाने व इस स्थान को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की गई थी।

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